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क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट! …७३ डॉलर पर पहुंची कच्चे तेल की कीमत

•फिर भी पेट्रोल-डीजल के भाव नहीं हुए कम
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
हिंदुस्थान एक ऐसा देश है, जहां क्रूड ऑयल के भाव इंटरनेशनल मार्वेâट में बढ़ते ही पेट्रोल के दाम भी बढ़ जाते हैं। मगर जब क्रूड ऑयल के भाव गिरते हैं, तब यहां भाव कम नहीं होते। सरकार सस्ता क्रूड खरीदकर उससे बना पेट्रोल महंगे दामों पर बेचती है। केंद्र सरकार ऐसे में क्रूड ऑयल पर खुद मुनाफाखोरी करना जारी रखती है।
बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से गिरावट जारी है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें पिछले कुछ महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं।

क्रूड की कीमतें इस समय गिरकर ७३ डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं। क्रूड का भाव ७३.६९ डॉलर पर आ गया है। ऐसे में सस्ते होते कच्चे तेल का फायदा तेल आयात करनेवाले हिंदुस्थान को होना चाहिए। मगर यहां की जनता को इसका फायदा नहीं हो रहा क्योंकि सरकार खुद मुनाफाखोरी में जुटी हुई है। यही कारण है कि देश में पेट्रोल-डीजल पर जनता को कोई राहत नहीं मिल रही है। कच्चे तेल में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कमजोर डिमांड है। दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंका और फिर से कोविड आने की खबर से क्रूड पर बुरा असर पड़ा है। इसके ब्याज दरों में बढ़ोतरी से भी कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि संभव है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम घट सकते हैं, लेकिन यह निर्भर करता है कि केंद्र और राज्य सरकारें कच्चे तेल पर सेस कितना घटाते हैं। हिंदुस्थान अपनी जरूरत का करीब ८५ फीसदी कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत घटने और रुपए की मजबूत होने से पेट्रोल-डीजल कम हो सकते हैं। तेल खरीदारों में हिंदुस्थान दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। एक तेल कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध डाटा के मुताबिक दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के जरिए १९.९० रुपए और राज्य सरकार वैट के जरिए १५.७१ रुपए वसूलती है। पेट्रोल की बेस प्राइस ५७.१५ रुपए प्रति लीटर है। इसमें टैक्स, वैट, भाड़ा और डीलर्स कमीशन जोड़कर ग्राहक को पेट्रोल बेचा जाता है।

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