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भाजपा राज में क्रूरता की हद पार : केंद्र की नाक के नीचे क्राइम!

महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध में दिल्ली नंबर १, यूपी नंबर २
एनसीआरबी का खुलासा
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र और उत्तर प्रदेश में बैठी भाजपा की सरकारें विकास को लेकर भले ही कितने भी दावे क्यों न कर लें। लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही दास्तां बयां कर रही है। विकास के बड़े-बड़े दावे करनेवाली भाजपा के राज में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। एनसीआरबी ने हाल ही में एक चौंकानेवाला खुलासा किया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा ३ दिसंबर, २०२३ को एक रिपोर्ट जारी की गई है। `क्राइम इन इंडिया रिपोर्ट २०२२’ नाम की इस रिपोर्ट में हिंदुस्थान में साल २०२२ में हुए अपराधों का विस्तृत डेटा दिया गया है, जिसके मुताबिक, साल २०२१ की तुलना में साल २०२२ में महिलाओं के खिलाफ अपराध, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बच्चों के खिलाफ अपराध, साइबर क्राइम और राज्य के खिलाफ (यानी सरकार के खिलाफ) अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। उससे भी अधिक चौंकानेवाला खुलासा तो यह है कि भाजपा राज में ही क्रूरता की सारी हदें पार होती हुई देखने को मिल रही हैं। आश्चर्य की बात तो ये है कि केंद्र के नाक के नीचे ही यह अपराध हो रहे हैं। राज्यों के बात करें, तो महिलाओं के खिलाफ होनेवाले अपराधों में दिल्ली नंबर १ और उत्तर प्रदेश नंबर २ पर हैं।
बता दें कि एनसीआरबी ने यह खुलासा किया है कि २०२२ में महिलाओं के खिलाफ अपराध ४ फीसदी बढ़ा है, जिसमें दिल्ली को सबसे असुरक्षित शहर बताया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध दर्ज किए गए। पिछले साल यूपी में ऐसे मामलों की संख्या ५६,०८३ थी। ‘भारत में अपराध २०२२’ रिपोर्ट के अनुसार, २०२१ में यूपी में ४९,३८५ ऐसे मामले दर्ज किए गए थे।
भारतीय दंड संहिता के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के ज्यादातर मामले ‘पति या उसके घरवालों द्वारा `क्रूरता’ (३१.४ प्रतिशत) वैâटेगरी के तहत दर्ज किए गए थे। इसके बाद ‘महिलाओं की किडनैपिंग’ (१९.२ प्रतिशत), ‘महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला’ (१८.७ प्रतिशत), और ‘बलात्कार’ (७.१ प्रतिशत) का नंबर आया।’

२०२२ में महिलाओं के खिलाफ अपराध ४ फीसदी बढ़ा
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के रजिस्टर मामलों की संख्या २०२१ में ४२८,२७८ की तुलना में २०२२ में ४ प्रतिशत बढ़कर ४,४५,२५६ हो गई। २० लाख से ज्यादा आबादी वाले मेट्रो शहरों में, २०२२ में ऐसे अपराधों की वृद्धि १२.३ प्रतिशत बढ़कर ४८,७५५ हो गई। यूपी के बाद महाराष्ट्र (४५,३३१ मामले) और राजस्थान (४५,०५८ मामले) थे। आंकड़ों से पता चला कि भारत के ज्यादातर राज्यों में महिलाओं के खिलाफ मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।

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