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महंगा कर दिया सिलिंडर, बिजली क्यों चाहिए मोदी? …बावनकुले को महिला ने बीच सड़क फटकारा

• हाथ-जोड़कर मौके से खिसके भाजपाई अध्यक्ष
सामना संवाददाता / मुंबई
२०२४ का लोकसभा चुनाव किसी भी तरह से जीतकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर देश का पीएम बनाने के लिए भाजपा, उसकी सोशल मीडिया सेल, सहयोगी संगठन, ‘ए’ व ‘बी’ पार्टियां तथा भक्त हरसंभव हथकंडे अपना रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल से हताश हो चुकी जनता झांसे में नहीं आ रही है। इसका प्रमाण महाराष्ट्र के वर्धा जिले में देखने को मिला। जहां एक सियासी आयोजन के दौरान एक सामान्य महिला ने महंगाई और मोदी सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल को लेकर भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले पर सवालों की बौछार शुरू कर दी, जिसके बाद बावनकुले महिला के समक्ष हाथ जोड़कर उल्टे पैर बागने को मजबूर हो गए।
बता दें कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में अभी से फील्डिंग लगा रहे भाजपाई नेताओं को यह अहसास होने लगा है कि केंद्र में उनकी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। ऐसा ही अनुभव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को भी हुआ। वर्धा में ‘संकल्प से समर्थन’ यात्रा के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने जनता से पूछा कि ‘क्या हम अगले प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चाहते हैं? इस पर वहां मौजूद एक महिला भड़क गई। महिला ने बावनकुले को डांट लगाते हुए कहा कि मोदी….मोदी…क्यों चाहिए मोदी? न सिर्फ सिलिंडर के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि आमदनी का पूरा पैसा लाइट बिल चुकाने में चला जाता है। हम क्या मिट्टी खाते हैं? महिला की ऐसी तीखी फटकार से बावनकुले सन्न रह गए। महिला के हाव-भाव देखकर बावनकुले ने धीरे से माइक नीचे कर दिया। इस पर महिला और भी भड़क गर्इं।

महिला बोली, ‘अब माइक मत उठाओ, मत लो, मत सुनो।’
भाजपा अध्यक्ष को दी चर्चा की चुनौती
महिला ने बावनकुले के साथ मंच पर चलकर चर्चा करने का अनुरोध किया, लेकिन बावनकुले उक्त महिला को बरगलाने का प्रयास करते रहे। नाकाम रहने पर भाजपा अध्यक्ष ने वहां से खिसकना ही मुनासिब समझा। इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
हम क्या मिट्टी खाते हैं?
बावनकुले के भाग जाने के बाद मीडिया प्रतिनिधियों ने महिला से पूछा कि सरकार ने क्या किया है? इस पर महिला ने कई समस्याएं सुनार्इं। बस एक सड़क बनाओ और मोदी का काम पूरा हो गया? हमारे घर में केवल एक पंखा और एक बल्ब है, फिर भी ६०० से ७०० रुपए बिल आता है। इतने सारा लाइट बिल वैâसे चुकाएं? एक तो नौकरी मिलना नामुमकिन है, उसमें कमाया गया सारा पैसा लाइट बिल में चला जाता है। तो हम क्या मिट्टी खाते हैं? महिला ने ये सवाल भी मोदी सरकार से पूछा। सरकार गरीबों को लूटने का काम कर रही है, सिलिंडर और लाइट बिल के दाम कम किए जाएं। हाथों में काम चाहिए। सिर्फ एक सड़क का निर्माण नहीं कराया जाना चाहिए। मैं एक ग्रामीण क्षेत्र की महिला हूं और मजदूरी करके अपना जीवन-यापन करती हूं, लेकिन हाथ में एक भी रुपया नहीं बचता। फिर सरकार किसानों को अनाज और मदद देती है और पूछती है कि मोदी क्यों चाहिए। हमें कवड़ी मोल भी नहीं दे रहे, ऐसे शब्दों में महिला ने सरकार को फटकार लगाई।

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