मुख्यपृष्ठनए समाचार‘ईडी’ सरकार की दादागीरी! ...५० खोखे, एकदम ओके पर गुस्सा

‘ईडी’ सरकार की दादागीरी! …५० खोखे, एकदम ओके पर गुस्सा

• विधानसभा के बाहर भिड़े शिंदे गुट और एनसीपी विधायक
राजन पारकर / मुंबई
महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र शुरू है। इस बीच एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिंदे गुट और एनसीपी विधायक भिड़ गए। ‘ईडी’ सरकार की दादागीरी शुरू हो गई है। बहुमत के आधार पर विपक्ष का आवाज कमजोर कर रही है।

महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र जब से शुरू हुआ है, तब से ही एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के विधायक विधानभवन के बाहर सीढ़ियों पर हाथों में बैनर लेकर सीएम एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों के खिलाफ ‘५० खोखे, एकदम ओके‘ (यानी ५० करोड़ में बिक गए और शिवसेना के उद्धव ठाकरे को छोड़ गए) के नारे लगा रहे हैं। जवाब में शिंदे गुट और भाजपा के विधायकों ने भी शिवसेना और एनसीपी से जुड़े सचिन वझे और लवासा घोटाले जैसे मामलों का जिक्र कर नारेबाजी शुरू की। इस पर एनसीपी के अमोल मिटकरी और शिंदे गुट के महेश शिंदे भिड़ गए।
विधानसभा की सीढ़ियों पर पहले भी विपक्षी नेताओं की ओर से सत्ताधारियों के खिलाफ नारेबाजी की जाती रही है। लेकिन आज सत्ताधारियों द्वारा पिछले दो दिनों से चली आ रही नारेबाजियों और विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ निषेध का कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिंदे गुट और भाजपा के विधायकों ने आघाड़ी सरकार के वक्त के झूठे भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को आधार बनाते हुए हाथों में तख्तियां लेकर विधानभवन की सीढ़ियों पर नारेबाजी की।

नारेबाजी, धक्का-मुक्की, गाली-गलौच… नहीं रहा फिर होश…
जब एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के विपक्षी विधायक पिछले दो दिनों की तरह ही आज भी नारेबाजी और विरोध-प्रदर्शन की प्लानिंग के साथ सीढ़ियों के पास पहुंचे तो उन्होंने सत्ताधारियों को वहां अपने खिलाफ पहले से ही नारेबाजी करते हुए पाया। इसके बाद एनसीपी की ओर से नारेबाजी की जाने लगी, ‘गाजर दिखाना बंद करो, बाढ़ग्रस्त किसानों की मदद करो’ इस तरह दोनों ही तरफ से नारेबाजियां गाली गलौच में तब्दील हो गई। बाद में बात और बढ़ गई धक्का-मुक्की होने लगी।
इस मुद्दे पर शिंदे गुट के विधायक भरत गोगावले ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘महाविकास आघाड़ी के विधायक पिछले कुछ दिनों से विधानभवन की सीढ़ियों पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। हमने आज आंदोलन किया। हम १७० हैं, वे ९९-१००। हम सब मिलकर आ गए होते तो सोचिए क्या होता? वे हम पर रोज आरोप लगा रहे हैं। हम बगल से चुप-चाप गुजर जा रहे हैं। हम उन्हें जवाब नहीं दे रहे थे। आज हम वहां पहले से ही मौजूद थे।

बीच-बचाव करने पहुंचे अजीत पवार
एनसीपी विधायकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ‘अंग पर आने पर सींग पर लेना’ यह उनकी संस्कृति है। हम तो विधानसभा और लोकतंत्र के नियमों और परंपराओं का पालन करने वाले लोग हैं। हमें शरद पवार ने जो संस्कृति सिखाई है, उन्हीं लोकतांत्रिक संस्कृति को अपनाने वाले लोग हैं। हम एनसीपी वाले उनकी तरह नहीं हैं। अमोल मिटकरी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘ शिंदे गुट के विधायकों ने गालियां दीं, धक्का-मुक्की की। इसलिए विधानभवन की सीढ़ियों के पास हंगामा हुआ। आखिर में हमारे नेता अजीत पवार आए और हमें बगल में होने के लिए कहा। इसलिए हम बगल में हो गए।’

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