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नेशनल पार्क पर मंडराया खतरा! …पुल चौड़ीकरण के काम में जाएगी वन क्षेत्र की जमीन सरकार ने दी मंजूरी

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई का ‘हार्ट’ कहे जाने वाले नेशनल पार्क यानी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) पर खतरा मंडरा रहा है। नेशनल पार्क के आस-पास बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं का काम चल रहा है। इन्हीं में से एक परियोजना के चलते पार्क में एक पुल और सड़क के चौड़ीकरण का काम किया जाएगा। इस कार्य को सरकार की तरफ से मंजूरी भी दे दी गई है, लेकिन इस काम के खिलाफ पर्यावरणविद् उतर आए हैं।
बताया जाता है कि इस पार्क में मनपा पहले एक पुल एवं सड़क के कुछ हिस्से को अधिक चौड़ा करना चाहती है। मनपा ने श्रीकृष्ण नगर पुल के पुनर्निर्माण के लिए एसजीएनपी की वन भूमि के एक हिस्से से डायवर्ट करने का प्रस्ताव दिया है। बोरीवली पूर्व में श्रीकृष्ण नगर, अभिनव नगर और शांतिवन को वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ने वाला यह २२ मीटर चौड़ा पुल २०२१ में आंशिक रूप से ढह गया था, अब इसका पुनर्विकास करते हुए इसे और चौड़ा किया जाएगा। इसके लिए एसजीएनपी की ७,८३६ वर्ग फुट भूखंड इस काम में चली जाएगी। अब इस काम का पर्यावरणविदों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि जंगल मुंबई के लिए जरूरी है। एमएमआरडीए यहां विकास के नाम पर जंगल को नुकसान पहुंचा रहा है।
मिल चुकी है मंजूरी 
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन संरक्षण अधिनियम १९८० के प्रावधानों के तहत मनपा का दावा है कि इस परियोजना के लिए ८ अगस्त, २०२३ को ही  पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है। वहीं एनजीओ ‘वनशक्ति’ का प्रतिनिधित्व करने वाले पर्यावरणविद् डी.स्टालिन ने कहा कि विकास परियोजनाओं के कारण वन भूमि लगातार कम हो रही है। उन्होंने वन क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण पर दुःख जताया।

नष्ट हो रहा है जंगल 
स्टालिन ने कहा कि अधिकारी राष्ट्रीय उद्यान के महत्व पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर दो महीने में नई परियोजनाएं सामने आ रही हैं, जिससे धीरे-धीरे हमारे जंगल नष्ट हो रहे हैं। इन महत्वपूर्ण समय में वन संरक्षण के प्रति वन मंत्री की प्रतिबद्धता की कमी स्पष्ट है और विभाग को यह स्वीकार करना चाहिए कि वन्यजीव संरक्षण अब प्राथमिकता नहीं है।

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