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बढ़ता ‘जेएन.१’ का खतरा, ऐसे वक्त : कोविड एडवांस पर ईपीएफओ का ‘झटका’!

अब संकट में नहीं निकाल सकते पैसा
कोरोना के मरीजों को मिली थी सुविधा

कोविड के दौरान ‘ईपीएफओ’ ने रिटायरमेंट सेविंग फंड से कोविड एडवांस की निकासी की सुविधा दी थी, लेकिन अब इस सुविधा को बंद कर दिया गया है। रिटायरमेंट फंड बॉडी ने एक सप्ताह पहले अपने अधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक में इस पैâसले की घोषणा की।’

संकटकाल में काम आए इसलिए हर व्यक्ति कुछ रुपए बचाकर रखता है। बैंकों में लोग इसीलिए पैसे जमा करते हैं। नौकरीपेशा वालों के रिटायरमेंट के बाद कोई दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार ने ‘ईपीएफओ’ यानी कर्मचारी भविष्य निधि की शुरुआत की थी। इसमें हर महीने कर्मचारी की सैलरी का कुछ हिस्सा जमा होता है। यह पैसे उसे रिटायरमेंट के बाद दिया जाता है। या फिर कुछ अति खास अवसर पर उसे रुपए निकालने की सुविधा है। देश में २०२०-२१ में जब कोरोना की पहली और दूसरी लहर पैâली थी तो आम लोगों को इसका महंगा इलाज कराना काफी मुश्किल हो गया था। हालांकि, सरकार ने काफी व्यवस्था की थी फिर भी काफी पैसे खर्च हो रहे थे। आम आदमी के लिए इसका जुगाड़ कर पाना काफी कठिन काम हो गया था। ऐसे में सरकार ने नौकरीपेशा वालों को यह सुविधा प्रदान की थी कि वह ईपीएफओ से अपना फंड का कुछ पैसा निकाल सकते हैं। इससे आम लोगों को काफी राहत मिली थी। मगर अब जबकि कोरोना के नया वैरिएंट पैâल रहा है तो एक बुरी खबर आई है कि सरकार इस सुविधा पर रोक लगाने जा रही है। अब क्यों रोक लगाने जा रही है, यह फिलहाल समझ से बाहर है।
हाल ही में इस तरह की खबर आई कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सदस्यों को दी गई एक स्पेशल सुविधा को वापस ले लिया है। एक तरह से यह आम आदमी के लिए किसी ‘झटके’ से कम नहीं है। कोविड १९ महामारी के दौरान ईपीएफओ ने रिटायरमेंट सेविंग फंड से कोविड एडवांस की निकासी की सुविधा दी थी, लेकिन अब इस सुविधा को बंद कर दिया गया है। रिटायरमेंट फंड बॉडी ने एक सप्ताह पहले अपने अधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक में इस पैâसले की घोषणा की। बैठक में भाग लेने वाले ईपीएफओ के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को इस बारे में जानकारी दी। हालांकि, अधिकारी ने इस बारे में यह भी कहा कि इस संबंध में नोटिफिकेशन अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन सॉफ्टवेयर में नॉन रिफंडेबल कोविड एडवांस को डिसेबल करने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि सब्सक्राइबर्स इसके लिए आगे आवेदन नहीं कर सकें। अब मोदी सरकार का यह आदेश एक तरह का तुगलकी फरमान ही कहा जाएगा। कर्मचारी कोई सरकार से कर्ज तो नहीं मांग रहे हैं। यह तो कर्मचारी का ही पैसा है, जो वे एडवांस में वह भी संकट के समय लेते हैं। हास्यास्पद तो यह है कि वे यह पैâसला ऐसे समय ले रहे हैं, जब कोविड एक बार फिर पांव पसार रहा है। बहरहाल, ईपीएफओ के ६ करोड़ से अधिक ग्राहक हैं और यह २० लाख करोड़ रुपए से अधिक के फंड का प्रबंधन करता है। सरकार ने मार्च २०२० में ईपीएफ योजना १९५२ में किए गए बदलावों के बारे में नोटिफिकेशन जारी किया था। इस प्रोविजन के तहत कोई भी ईपीएफ सब्सक्राइबर तीन महीने की बेसिक सैलरी और डीए के बराबर या ईपीएफ अकाउंट में जमा कुल रकम के ७५ फीसदी हिस्से में से जो कम हो उसे निकाल सकता था। नौकरीपेशा लोगों के पीएफ खाते में उनकी सैलरी में से हर महीने एक निश्चित अमाउंट काटकर जमा किया जाता है। इस पैसे पर सालाना ब्याज भी मिलता है। मगर अब मोदी सरकार के इस फैसले ने लोगों को हैरान कर दिया है।

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