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डेंजरस किलर… दुनिया का कोई कोना नहीं बचा स्वच्छ … दूषित हवा हर साल ले रही है ८० लाख लोगों की बलि!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दुनिया में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ता जा रहा है कि अब दुनिया का ऐसा कोई भी कोना नहीं बचा है, जहां किसी को शुद्ध हवा मिल रही हो। पूरी दुनिया में सालभर में ७० फीसदी दिनों में हवा प्रदूषित ही रहती है। दुनिया की कुल आबादी में सिर्फ ०.०००१ फीसदी आबादी को ही कम प्रदूषित हवा मिल रही है। प्रदूषित हवा हर साल ८० लाख लोगों की बलि ले रही हैं, जो कि अब डेंजरस किलर साबित हो रही हैं। ये खुलासा ‘द लैंसेट जर्नल’ की रिपोर्ट में हुआ है
इस नक्शे में देख सकते हैं कि कहां पर पीएम २.५ का स्तर कितना है। हवा में प्रदूषण का स्तर २.५ पीएम है। २.५ माइक्रोमीटर यानी पीएम २.५ आकार के प्रदूषणकारी कण आपकी सांस के रास्ते खून में मिल जाते हैं, जिनकी वजह से स्ट्रोक, लंग वैंâसर और दिल की बीमारियां हो रही हैं।

६५ देशों से लिया गया हवा का सैंपल
यह स्टडी ६५ देशों में लगे ५,४४६ मॉनिटरिंग स्टेशन से हासिल किए गए डेटा के आधार पर की गई है। पूर्वी एशिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण है। पिछले दो दशकों में इस इलाके में ५० एम ३ की मात्रा में पीएम २.५ के एक्सपोजर का सालाना औसत देखा गया है। इसके बाद ३७.२ एम ३ के साथ दक्षिण एशिया का इलाका आता है। आखिरी में ३०/ एम ३ के साथ उत्तरी अप्रâीका सबसे कम प्रदूषण और न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया में पिछले दो दशक में पीएम २.५ का सबसे कम प्रदूषण ८.५ एम ३ दर्ज किया गया। इसके बाद १२.६ एम३ ओशिनिया और १५.६ एम ३ दक्षिणी अमेरिका में, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में २००० से २०१९ के बीच वायु प्रदूषण का स्तर कम हुआ है। मोनाश यूनिवर्सिटी के एयर क्वालिटी रिसर्चर यूमिंग गुओ ने कहा कि इस स्टडी से हमें पता चल रहा है कि बाहर कितना वायु प्रदूषण है। इसका इंसानों की सेहत पर कितना असर पड़ रहा है। इसकी मदद से सरकारें, नीति निर्धारण करनेवाले लोग लंबे समय के लिए नियम-कायदे बना सकेंगे।

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