मुख्यपृष्ठनए समाचारदहशतगर्दी का खतरनाक रास्ता... घाटी में बिगड़ रहे हालात!

दहशतगर्दी का खतरनाक रास्ता… घाटी में बिगड़ रहे हालात!

  • पढ़े-लिखे युवा भी भटककर बन रहे हैं आतंकी
  •  सिक्योरिटी एजेंसीज के सामने यह नई चुनौती

सामना संवाददाता / श्रीनगर
कश्मीर घाटी में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घाटी में तैयारी कर रहे छात्र भटककर आतंकी बन रहे हैं। इस खतरनाक ट्रेंड ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। परेशान माता-पिता अपने बच्चों से लौटने की अपील कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि २०१९ में अनुच्छेद ३७० रद्द करने के बाद स्थिति पहली बार इतनी बिगड़ी है। अप्रैल तक सुरक्षा एजेंसियां दावा कर रही थीं कि घाटी में युवाओं के आतंकी बनने का ट्रेंड लगभग खत्म हो चुका है। कुछ अनुमानों के मुताबिक इस साल के पहले चार महीने में सिर्पâ १४ युवा ही आतंकी बने लेकिन मई में सब कुछ बदल गया। हर रोज युवा गायब हो रहे हैं और आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। एक डर यह है कि ऐसे तमाम युवा लापता हैं, जिनके बारे में परिजनों ने रिपोर्ट नहीं लिखाई है। ऐसे में युवाओं के आतंकी बनने की लिस्ट और लंबी हो सकती है।
पाक से वीडियो से मिल रही ट्रेनिंग
सख्त पहरे के चलते आतंकी अब ट्रेनिंग लेने पाक नहीं जा पा रहे। ऐसे में इन्हें वीडियो के जरिए ट्रेनिंग दी जा रही है। जबकि पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या को सामान्य हालात नहीं कह सकते। यहां युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अनुच्छेद ३७० हटने के बाद डेमोग्राफी बदल रही है। शेष भारत में धार्मिक विवाद भी आग में घी का काम कर रहा है।
ड्रोन के जरिए घाटी में आ रहे छोटे हथियार
पिछले साल तक आतंकी गोला-बारूद की कमी का सामना कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान से ड्रोन और सुरंगों के जरिए जम्मू बॉर्डर से पिस्टल, स्टिकी बम व अन्य हथियारों की बड़ी खेप भेजी गई है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने छह महीनों में ७ ड्रोन को गिराया है और पाक सीमा पर तीन सुरंग खोज निकाली हैैं।
पार्ट टाइम आतंकी बड़ी चिंता
घाटी में हाइब्रिड आतंकी सुरक्षाबलों के लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं। एक सूत्र ने बताया कि हाइब्रिड आतंकवादी कोई भी हो सकता है। यह छात्र, कार्यकर्ता या किसान भी हो सकते हैं। इन्हें इंटरनेट के जरिए ट्रेनिंग मिलती हैै, टारगेट दिया जाता है। ये काम खत्म करने के बाद सामान्य जीवन जीने लगते हैं और जरूरत पड़ने पर एक्टिव टेरेरिस्ट बन जाते हैं।

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