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खतरनाक सिकलसेल! अनुवांशिक है यह बीमारी:  इस रोग से दुर्बल हो जाता है शरीर

  • राज्य सरकार अमल में ला रही उपाय योजनाएं

सामना संवाददाता / मुंबई
अनुवांशिक बीमारी सिकलसेल डिजीज का खतरा महाराष्ट्र में बढ़ रहा है। वहीं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर राज्य सरकार लोगों में जागरूकता फैलाने  के साथ ही कई तरह के उपाय योजनाओं को अमल में ला रही है। सरकार की उपाय योजनाओं से इस बीमारी को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
बता दें कि सिकलसेल डिजीज में शरीर को दुर्बल करनेवाले दर्द मुख्य लक्षणों में एक हैं। इसके अलावा इसमें निमोनिया, रक्त प्रवाह में संक्रमण, स्ट्रोक और तीव्र या पुराने दर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआत हो सकती है। अनुमान लगाया है कि नाइजीरिया के बाद हिंदुस्थान दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है। यहां की आदिवासी आबादी में एमसीडी के अनुमानित १४ लाख मरीजों के होने की संभावना है।
एससीडी को नियंत्रित करने का प्रयास
एससीडी मरीजों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए विश्व स्वास्थ्य परिषद ने नवजात शिशुओं की जांच, उपचार और परामर्श के साथ-साथ वैवाहिक परामर्श और माता-पिता में रोग के निदान जैसे तरीकों से इसकी रोकथाम के लिए सिफारिशें की हैं। मुंबई अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एमबी अग्रवाल के मुताबिक एससीडी के वाहकों में कोई लक्षण नहीं दिखाते हैं। इसलिए यदि इस बीमारी को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने से रोकना है तो स्क्रीनिंग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हर महीने २ से ३ एससीडी मरीज इलाज के लिए आते हैं। बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ती है तो इसे शुरुआत से ही पकड़कर उस पर उपचार किया जा सकता है।
पूर्वी जिलों में ज्यादा प्रभाव
आदिवासी मामलों के मंत्रालय के अनुसार अनुसूचित जनजाति में जन्म लेने वाले प्रत्येक ८६ बच्चों में से एक को एससीडी है। महाराष्ट्र हिंदुस्थान की कुल आदिवासी आबादी में से ८३ फीसदी क्षेत्र को कवर करनेवाले १० राज्यों में से एक है। इसलिए महाराष्ट्र में खतरा ज्यादा है। जानकारी के अनुसार एससीडी का प्रभाव महाराष्ट्र के पूर्वी जिलों में अधिक है।

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