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हुस्न के जाल में फंसाती थी खतरनाक जासूस: देशसेवा पर मिली दर्दनाक मौत!

ड्यूक्जिएम् ब्यूरो डे ल`एटैट-मेजर जनरल’ फ्रांस की एक सैन्य खुफिया एजेंसी का दफ्तर। पेरिस। खुफिया एजेंसी का हेड ऑफिसर जॉर्ज लैडॉ अपने दफ्तर में तेजी से चहलकदमी कर रहा था। उसका दिमाग बिजली की तेजी से काम कर रहा था। यह प्रथम विश्वयुद्ध का समय था। दरअसल, १९१६ में हुई दो बड़ी लड़ाइयों में फ्रांस का पलड़ा हलका होता गया था। सेना का मनोबल गिर गया था। ऐसे में सैन्य खुफिया एजेंसी ने योजना तैयार की थी कि वह किसी देशद्रोही को पकड़कर देश के सामने लाएंगे,ताकि देश का और सेना का मनोबल फिर से ऊंचा हो जाए और यह जिम्मेदारी लैडॉ के कंधों पर थी। काफी दिनों तक हो इस विषय में सोचता रहा कि किसे बलि का बकरा बनाया जाए।
आज दफ्तर में पहुंचते-पहुंचते उसकी आंखों के सामने खूबसूरत माता हारी घूमने लगा था। उसके किसी एजेंट ने उसे बताया था कि माता हारी को पैसों की सख्त जरूरत है। इसके साथ-साथ माता हारी को अपने प्रेमी से भी मिलना था, जो मिलिट्री बेस अस्पताल में अपना इलाज कर रहा था। वैâप्टन वादीम मास्लोव, तकरीबन २३ साल का रशियन पायलट जो प्रâांस के बेड़े में शामिल था। यूरोप के शाही राजघरानों, रईसों और सेना के उच्च अधिकारियों को अपने खूबसूरत हुस्न के जलवे में उलझाकर रखनेवाली माता हारी वैâप्टन के प्यार में उलझ कर रह गई थी। वह उससे शादी करना चाहती थी। खुफिया एजेंसी के दफ्तर में लैडॉ से मिलने की बात से माता हारी थोड़ी-सी असहज थी, लेकिन उसकी जरूरतें उसे यहां खींच लाई। लैडॉ ने उठकर उसका स्वागत किया। लैडॉ ने उसे कहा, `मैं तुम्हें १० लाख फ्रैंक दूंगा… लेकिन तुम्हें एक छोटा-सा काम करना होगा। जासूसी… देश के लिए जासूसी फ्रांस के लिए… मुझे नहीं लगता कि तुम्हें कोई तकलीफ होगी…बोलो मंजूर है?’ माता हारी ने सिर झुका लिया। उसे जर्मन फौजियों की जासूसी करनी थी। उसे स्पेन भेज दिया गया। वहां उसकी मुलाकात जर्मन डिप्लोमेट से कराई गई। अपनी चातुर्य से उसने बहुत सारी खुफिया जानकारियां हासिल कीं, जो उसने खतों के जरिए लैडॉ तक पंहुचा दी।

५० हजार फ्रांसीसी सैनिकों को मारने का लगा था आरोप
फरवरी २०१७। माता हारी को अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर आरोप लगाया गया कि वह फ्रांस की गुप्त जानकारी जर्मन डिप्लोमेट को दे रही थी। माता हारी उस खुफिया अफसर के जाल में बुरी तरह फंस गई थी। उसने खुद को बेकसूर साबित करने की पूरी कोशिश की। उसे डबल एजेंट साबित कर दिया गया। कोर्ट ने माता हारी को अपराधी मानते हुए उसकी मौत की सजा मुकर्रर की। उस पर ५० हजार  फ्रांसीसी सैनिकों के मारे जाने का आरोप लगा। फ्रांस की मीडिया, अखबार माता हारी के तथाकथित काले कारनामों से भरे हुए थे। माता हारी के खिलाफ एक जनआक्रोश पैदा हो गया था। लोगों का ध्यान फ्रांसीसी सेना की गिरती साख, जिसकी जिम्मेदार खुद सेना ही थी, से भटककर माता हारी पर चला गया। अब देश की सबसे बड़ी गद्दार अपराधी वह थी और यही खुफिया एजेंसी की योजना थी। माता हारी को बलि बकरा बना दिया गया।

दुनिया की सबसे खूबसूरत जासूस की दुखद प्रेम कहानी
दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत की जिंदगी का आज अंतिम दिन था। उसने हमेशा की तरह अपने वकील से बात की। उसके साथ आज तक रह रही दो र्ह्लिज्युयस नन थीं। एक गाड़ी में बिठाकर उन्हें पेरिस के बाहर एक मैदान में लाया गया। माता हारी गाड़ी से उतरी। मैदान में सैनिक अधिकारी खड़े थे। १२ सैनिक उसकी तरफ बंदूक ताने खड़े थे। एक अफसर ने उसे सफेद कपड़ा ओढ़ने के लिए दिया, लेकिन उसने मना कर दिया। माता हारी ने अपनी आंखों में काली पट्टी बांधने से भी इनकार कर दिया। शायद वह उन आंखों में आंखें डालकर देखना चाहती थी, जिन्होंने अपनी साख बचाने के लिए उसे गद्दार साबित कर दिया था। उसने अपने होठों को हल्की-सी जुम्बिश दी और किस की शक्ल में हवा में उछाल दिया। मानो उसने उन्हें माफ कर दिया! या फिर उनका उपहास किया! अफसर का इशारा हुआ और १२ बंदूकें एक साथ गरज उठीं। माता हारी की जीवनी पर पॉउलो कॉएलो ‘द स्पाई’ नामक उपन्यास में वह लिखते है, `एक ऐसी महिला की अविस्मरणीय कहानी है, जिसने परंपराओं को तोड़ने का साहस दिखाया और आखिर में उसे इसी की कीमत चुकानी पड़ी!’

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