मुख्यपृष्ठनए समाचारस्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा का दर्शन-पूजन शुरू... श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम

स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा का दर्शन-पूजन शुरू… श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम

उमेश गुप्ता / वाराणसी

धनतेरस के अवसर पर काशी में माता अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन की विशेष मान्यता है। इस दिन से लेकर अन्नकूट तक स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा का दर्शन-पूजन होता है। इस दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं। शुक्रवार को धनतेरस पर भक्तों का वर्ष भर का इंतजार समाप्त हुआ और स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन हेतु कपाट खोला गया।
माता के दर्शन-पूजन हेतु गुरुवार की देर रात्रि से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। मंदिर परिक्षेत्र में बैरिकेडिंग लगाई गई थी, जहां श्रद्धालु कतार में लग रहे। माता के श्रृंगार-पूजन के पश्चात आम श्रद्धालुओं हेतु पट खोला गया और बाबा भोले को अन्य धन की भिक्षा देने वाली माता अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन का क्रम इसी के साथ शुरू हो गया।
बता दें कि हर वर्ष माता के दर्शन चार दिन होते हैं, लेकिन इस बार 5 दिनों तक माता के दर्शन-पूजन किए जा सकेंगे। मंदिर आने वाले भक्त अस्थाई सीढ़ी से होते हुए प्रथम तल पर विराजमान स्वर्णमई माता अन्नपूर्णा का दर्शन किया। वहीं धनतेरस के दिन विशेष रूप से माता के खजाने का वितरण किया जाता है और ऐसी मान्यता है कि इस प्रसाद को जो भी भक्त पता है, उसे कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। माता अन्नपूर्णा का आशीष सदैव उनके साथ रहता है, ऐसे में दर्शन के लिए पहुंचे भक्तों में खजाने का वितरण हुआ तो भक्तों ने स्वयं को धन्य महसूस किया। माता के दर्शन के लिए अपार भीड़ उमड़ी हुई है और माता के दर्शन-पूजन का क्रम निरंतर जारी है।
मंदिर के महंत के अनुसार, मंदिर में 500 साल पुरानी स्वर्ण प्रतिमा स्थापित हैं, जो मां अन्नपूर्णा की मूर्ति के साथ ही विराजमान हैं। मंदिर के महंत शंकर पुरी जी महाराज ने बताया कि धनतेरस के दिन मंदिर का अनमोल खजाना खोला जाता है। इसका महत्व मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाओं मे है। माना जाता है कि एक बार काशी में अकाल पड़ा था, तब भगवान शिव ने लोगों का पेट भरने के लिए मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मां ने भिक्षा के साथ भगवान शिव को यह वचन दिया कि काशी में अब से कभी कोई भूखा नहीं सोएगा। काशी में आने वाले हर किसी को अन्न मां के ही आशीर्वाद से प्राप्त होता है।

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