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डेटिंग ऐप हुए डाउन!… श्रद्धा के हश्र से महिलाओं ने किया किनारा

•  टिंडर से बिंबल तक राइट क्लिक से हुआ परहेज
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रेम प्रसंग में पहल करने में हिंदुस्थानी महिलाएं हमेशा संकोच करती रही हैं। डेटिंग ऐप्स के लांच होने से उन्हें मौका मिला, फिर भी महिलाएं फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाती रही हैं। क्योंकि डेटिंग ऐप पर स्वाइप करते समय महिलाओं में एक्साइटमेंट और उम्मीद के बीच एक अनचाहा डर छिपा होता है। लेकिन श्रद्धा वालकर की हत्या के बाद अब वह डर और गहरा गया है। श्रद्धा के साथ हुए हश्र की वजह से महिलाओं ने डेटिंग ऐप्स से किनारा कर लिया है, जिसके कारण ऐप्स डाउन हो गए हैं। महिलाएं पार्टनर के साथ मिलने-जुलने से परहेज करने लगी हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में जारी प्रोपब्लिका और कोलंबिया जर्नलिज्म इन्वेस्टिगेशन की २०१९ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल १२,०० महिलाओं में से एक तिहाई ने माना था कि ऐप पर मिले उनके साथी ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। मुंबई की एक फिल्ममेकर के अनुसार २०१९ में लगभग तीन महीने तक वो एक विज्ञापन निर्माता के साथ थीं और जुलाई में दोनों अलग हो गए। मैं उसके बारे में सब भूल गई और किसी अन्य शख्स को डेट करना शुरू कर दिया। वो आगे बताती हैं कि क्रिसमस पर वह शख्स फिर से मेरे घर के पास आया और ऊपर आने की जिद करने लगा। रात के ११.३० बज रहे थे और मैंने उससे वहां से थोड़ा जल्दी निकलने के लिए कहा लेकिन उसने शराब पीना शुरू कर दिया। इसके बाद नशे में चिल्लाते हुए वह बताने लगा कि उसने अपनी मां को मेरे बारे में बताया है। नई दिल्ली में रहनेवाली एक लेखिका ने बताया कि मैं हिंज पर एक व्यक्ति से मिली थी। उसने मेरे साथ बलात्कार किया। मैंने ऐप पर तुरंत इसकी शिकायत की।
ऐप्स वालों का दावा
टिंडर का दावा है कि इस तरह की रिपोर्टों से निपटने के लिए उसके पास एक समर्पित टीम है और वह टीम कानून-व्यवस्था के साथ मिलकर काम करती है। वहीं िंबबल का कहना है कि वालकर की मौत के बारे में सुनकर वह परेशान हो गया और अपने यूजर की सुरक्षा के लिए अपने पास मौजूद मैकेनिज्म को सूचीबद्ध किया। हालांकि टिंडर और बिंबल ने इस साल उन्हें मिली शिकायतों की संख्या या उनके द्वारा ब्लैकलिस्ट किए गए अकाउंट के डेटा साझा नहीं किए हैं।

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