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दिन-विशेष: आज गुरु पूर्णिमा: गुरु और भगवान विष्णु के आशीष से मिलेगा धन-धान्य एवं ज्ञान!

हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा त्योहार का काफी महत्व है। हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में गुरु पूर्णिमा त्योहार का ऐतिहासिक महत्व रहा है। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग ३,००० ई. पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर साल आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। साथ ही यह भी मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास जी ने शिष्यों एवं मुनियों को सर्वप्रथम श्री भागवत पुराण का ज्ञान दिया था। तभी से गुरु को पूजने के लिए गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता रहा है। गुरु पूर्णिमा इस बार आज मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजा और दान पुण्य का विशेष महत्व है। दरअसल हिंदू धर्म ग्रंथों व शास्त्रों में भी कहा गुरु को ही ईश्वर के विभिन्न रूपों- ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश्वर के रूप में बताया गया है। गुरु को ब्रह्मा का ही रूप बताया गया है क्योंकि गुरु ही शिष्य को बनाता है, नव जन्म देता है। इस गुरु और भगवान विष्णु की पूजा करने से धन-धान्य एवं ज्ञान की प्रप्ति होती है।
बन रहे हैं पंच महापुरुष योग
आज ग्रहों का बहुत ही सुंदर योग बन रहा है। ५ ग्रह मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि अपनी-अपनी राशि में रह करके इस दिन के महत्व को अनंत गुना बढ़ा देंगे। इन ग्रहों की स्थिति के आधार पर इस दिन पांच प्रकार के पंच महापुरुष योगों का निर्माण होगा। साथ ही दोनों गुरु देव गुरु बृहस्पति एवं दैत्य गुरु शुक्र अपनी-अपनी राशि में रहकर के गुरु पूर्णिमा के महत्व को बढ़ाने वाले होंगे। भूमि भवन वाहन के कारक ग्रह मंगल अपनी राशि मेष में रहकर रूचक नामक पंच महापुरुष योग का निर्माण करेंगे।
पूजा विधि
गुरु पूर्णिमा के दिन पूजन में पान का पत्ता, पीला कपड़ा, पीला मिष्ठान, नारियल, पुष्प, इलायची, कर्पूर, लौंग व अन्य सामग्री शामिल करना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगा जल डालकर स्नान करना चाहिए। उसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और पूजा के बाद गुरु मंत्र का जाप करें।
तिथि एवं मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि का आरंभ है १२ जुलाई २०२२, दिन मंगलवार की रात में २.३५ के बाद हुआ जो १३ जुलाई २०२२ दिन बुधवार की रात में १२.०६ तक व्याप्त होगा। ऐसी स्थिति में पूर्णिमा तिथि सूर्याेदय से लेकर सूर्यास्त तक प्राप्त होगी। अत: पूरा दिन स्नान दान और पूजन के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरुजनों की कृपा प्राप्ति, आशीर्वाद प्राप्ति के निमित्त पूजा-पाठ यज्ञ के साथ-साथ दान दक्षिणा देते हैं।
इन गुरु मंत्रों का करें जाप
ॐ गुं गुरवे नम:। ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:।
ॐ बृं बृहस्पतये नम:। ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।
ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:।

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