मुख्यपृष्ठधर्म विशेषदिन-विशेष : चंद्रदेव की उपासना से दूर होती है आर्थिक तंगी!

दिन-विशेष : चंद्रदेव की उपासना से दूर होती है आर्थिक तंगी!

हिंदुस्थान में तिथियों और त्योहारों का बहुत महत्व है। वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। बौद्ध धर्म के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा को गौतम बुद्ध के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि को महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। इस साल बुद्ध पूर्णिमा १६ मई सोमवार यानी आज है। बुद्ध पूर्णिमा का दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा उत्सव होता है। हिंदू धर्म के अनुसार गौतम बुद्ध भगवान विष्णु के न्aाौवें अवतार माने जाते हैं। इस दिन भगवान बुद्ध के अलावा भगवान विष्णु और भगवान चंद्रदेव की पूजा की जाती है। हिंदू और बौद्ध दोनों धर्म के लोग इस दिन को धूमधाम के मानते हैं।
पूजा विधि
पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व माना गया है। बुद्ध पूर्णिमा के सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और बहते पानी में तिल प्रवाहित करें। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आज पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए। इस दिन दान-दक्षिणा का विशेष महत्व है।
बुद्ध पूर्णिमा व्रत के फायदे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रदर्शन किए बिना व्रत पूरा नहीं होता। इसलिए इस दिन चंद्रदेव के दर्शन जरूरी होते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्रदेव की उपासना करने से आर्थिक तंगी दूर होती है। इस दिन दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

हिंदुस्थान में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण
आज वैशाख पूर्णिमा है। आज साल २०२२ का पहला चंद्र ग्रहण भी लगेगा। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है। चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि और विशाखा नक्षत्र में लगेगा। हिंदुस्थान में इस चंद्र ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा, जिसके कारण सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा। आज लगनेवाला चंद्र ग्रहण इस साल का पहला चंद्र ग्रहण होगा और इस ग्रहण की अवधि कुल मिलाकर १ घंटे २४ मिनट की होगी। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण सुबह ०८ बजकर ५९ मिनट से सुबह १० बजकर २३ मिनट तक रहेगा। यह चंद्र ग्रहण हिंदुस्थान में दिखाई नहीं देगा। इससे पहले ३० अप्रैल को भी सूर्य ग्रहण लगा था वह भी हिंदुस्थान में नहीं दिखाई दिया था। यह चंद्र ग्रहण यूरोप, दक्षिण-पश्चिमी एशिया, अफ्रीकी , उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में दिखाई देगा।

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