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जमीन से बाहर निकल रही हैं लाशें! … शवों को दफनाने के लिए नहीं है कब्रिस्तान 

• हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, मनपा को लगाई फटकार
सामना संवाददाता / मुंबई 
शव जमीन से बाहर आ रहे हैं और आपको वैकल्पिक कब्रिस्तान पर निर्णय लेने के लिए हमारे आदेशों की आवश्यकता है। कम से कम ऐसे मामले में तो थो़ड़ी संवेदनशीलता दिखाइए। गोवंडी में कब्रिस्तान को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और महानगरपालिका को फटकार लगाई। बता दें कि कब्रिस्तान बंद करने के संबंध में एडवोकेट समशेर अहमद, मोहम्मद अबरार चौधरी, अब्दुल रहमान शाह ने जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की बेंच के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अल्ताफ खान उपस्थित हुए। मामला लंबित होने के कारण कोर्ट ने राज्य सरकार और महानगरपालिका पर नाराजगी जाहिर की। अब इस मामले में अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

राज्य सरकार और मनपा करें विचार
कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि गोवंडी में कोई वैकल्पिक कब्रिस्तान नहीं है, नागरिकों को दाह संस्कार के लिए शव को ७ किमी दूर ले जाना पड़ता है। क्या आपको नागरिकों की परवाह नहीं है? ऐसी समस्याओं पर राज्य सरकार और नगर निगम को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

क्या मुंबई में जगह दी गई है?
कोर्ट ने पूछा कि क्या मुंबई में कब्रिस्तान के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है? उसके लिए क्या मापदंड हैं? कोर्ट ने आदेश दिया कि शहरी विकास विभाग शपथपत्र पर यह जानकारी दे कि कब्रिस्तान के लिए जगह उपलब्ध कराने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

सम्मान के साथ मरने का भी अधिकार
कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस तरह संविधान ने सम्मान से जीने का अधिकार दिया है, उसी तरह सम्मान से मरने का भी अधिकार दिया है। साथ ही नगरपालिका के नियम कहते हैं कि श्मशान घाट के लिए जगह उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी आयुक्त की है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि प्रशासन को इस नियम की याद दिलाने की जरूरत है।

क्या है याचिकाकर्ता की मांग?
गोवंडी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मनपा से श्मशान भूमि के लिए जगह की मांग की थी, जिसके बाद मनपा ने देवनार, रफीक नगर और आणिक डिपो के पास जगह देने का आश्वासन दिया गया था। बाद में मनपा ने श्मशान भूमि के लिए देवनार में जगह दी, लेकिन थोड़े दिन बाद इस जगह को एसआरए योजना के लिए दे दिया गया। इसके बावजूद यहां श्मशान भूमि के लिए कुछ जगह देना अनिवार्य है, जबकि रफीक नगर वाली जगह को लेकर मनपा का कहना है कि यहां कचरा डंप किया जाता है। इस जगह को साफ करने के लिए २०० करोड़ रुपए का खर्चा होगा, वहीं आणिक नगर वाली जगह ८ किमी दूर है इसलिए देवनार में ही जगह उपलब्ध कराई जाए, ऐसी मांग याचिका के माध्यम से की गई है।

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