मुख्यपृष्ठसमाचारबच्चों में बढ़ रहा है घातक कैसर!

बच्चों में बढ़ रहा है घातक कैसर!

-टाटा अस्पताल ने प्रति वर्ष ६ हजार बच्चों के इलाज का रखा लक्ष्य

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

बच्चों में कैसर के बढ़ते प्रमाण को देखते हुए मुंबई के परेल स्थित टाटा अस्पताल की तरफ से बाल चिकित्सा उपचार क्षमता में विस्तार करने का फैसला किया गया है। इसके तहत बच्चों में कैसर के इलाज के लिए पांच संबद्ध सेंटरों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस संबंध में एक योजना भी तैयार की जा रही है। इसके साथ ही आनेवाले दिनों में इन सेंटरों के माध्यम से हर साल छह हजार से अधिक कैसर पीड़ित बच्चों का इलाज संभव हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि परेल स्थित टाटा अस्पताल में कैसर से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाता है। टाटा अस्पताल के माध्यम से खारघर सहित गुवाहाटी, वाराणसी, विशाखापट्टनम और चंडीगढ़ के अस्पतालों में हर साल ४,००० से अधिक कैसर पीड़ित बच्चों का इलाज होता है। चंडीगढ़ और विशाखापट्टनम में सिर्फ १०० बच्चों के इलाज की सुविधा है। हालांकि, बीते कुछ सालों में जिस रफ्तार से बच्चों में घातक कैसर बढ़ रहा है। उसे देखते हुए उपचार की क्षमता को बढ़ाए जाने की जरूरत महसूस होने लगी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक बच्चों को इलाज मिले, इसके लिए टाटा अस्पताल ने कमर कस ली है। इसके तहत सभी संबद्ध सेंटरों में बाल रोगियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने का फैसला किया है।
अभी छह सेंटरों में ही यह सुविधा
फिलहाल यह सुविधा छह सेंटरों में उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही अन्य पांच सेंटरों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक सेंटर को हर साल कम से कम एक हजार मरीजों का इलाज करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। टाटा अस्पताल के पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख गिरीश चिन्नास्वामी ने बताया कि सभी सेंटरों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने में कम से कम दो साल लगने की संभावना है।
हिंदुस्थान में हर साल मिलते हैं ७०,००० बाल कैसर रोगी
बताया गया है कि हिंदुस्थान में हर साल लगभग ७०,००० बच्चों में कैसर का पता चलता है, जबकि इसमें से बडी संख्या में बाल कैसर रोगियों की मौत हो जाती है। इसे देखते हुए रास्ता निकालने के लिए टाटा अस्पताल ने अपनी कमर कस ली है।

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