मुख्यपृष्ठनए समाचारसेना में कटौती घातक! शिवसेनापक्षप्रमुख ने दी चेतावनी

सेना में कटौती घातक! शिवसेनापक्षप्रमुख ने दी चेतावनी

सामना संवाददाता / मुंबई
`मार्मिक’ के स्थापना दिवस पर राज्य की जनता को संबोधित करते हुए शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम देश की स्वतंत्रता का ७५वां वर्ष मना रहे हैं। घर-घर तिरंगा लगा रहे हैं। लेकिन अपना परिवार, घर-द्वार छोड़कर देश और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगानेवाले सीमा पर तैनात सेना के जवानों की संख्या में कटौती की जाएगी, यह खबर बेहद घातक और गंभीर है। यह खर्च बचाकर उसे सेना के आधुनिकीकरण के उपयोग में लाया जाएगा। भारी सेना हो और उसे अत्याधुनिक हथियार भी मिलने चाहिए। लेकिन हथियार खरीदने के लिए लोग कम कर दिए गए तो वे हथियार किसके हाथों में देंगे? आपके पास सरकार गिराने के लिए पैसे हैं, लेकिन सेना चलाने के लिए नहीं है। इन शब्दों में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को चेतावनी दी।
इस अवसर पर शिवसेनाप्रक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि सेना में कटौती करने का मोदी सरकार का यह निर्णय देश के लिए घातक है। इसके साथ ही उन्होंने `घर-घर तिरंगा’ मुहिम सहित अनेक मुद्दों को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिसके कारण तिरंगे की रक्षा हो रही है, जिनकी वजह से सुरक्षित रहकर हम अपने घर पर तिरंगा लगा सकते हैं, डीपी पर रख सकते हैं, उसी सेना में कटौती करनेवाले हैं तो `भारत माता की जय’ चिल्लाने भर से शत्रु भाग नहीं जाएगा। ऐसा सुनने में कभी नहीं आया कि चीन और अमेरिका ने आधुनिकीकरण के लिए अपनी सेना कम कर दी है। क्या  सिर्फ तिरंगा लगाने से चीन पीछे हट जाएगा? तिरंगा फहराएं लेकिन सीमा पर तैनात सैनिकों को भी लगना चाहिए कि पूरा देश हमारे साथ है। उन्होंने कहा कि मैं आज राजनीति पर बात नहीं करना चाहता। लेकिन जब महाराष्ट्र में विपदा आई है तो सरकार का पता नहीं है, मंत्रियों का पता नहीं है। मौज-मस्ती शुरू है।
तिरंगा तो है लेकिन घर नहीं
तिरंगा तो मिल रहा है लेकिन उसे लगाने के लिए घर ही नहीं है। इस आशय के एक व्यंग्य चित्र का उदाहरण इस दौरान उद्धव ठाकरे ने दिया। हर घर तिरंगा लगाओ, लेकिन स्वतंत्रता के ७५वें वर्ष में भी जिनके पास घर नहीं है, वे तिरंगा कहां लगाएंगे? ऐसा मर्मभेदी सवाल उन्होंने मोदी सरकार से किया। जान की बाजी लगाकर देश की सुरक्षा करनेवाले सैनिकों आप अकेले नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण देश आपके पीछे खड़ा है, इसका अहसास दिलाने के लिए केवल घर-घर पर ही नहीं, बल्कि दिल में भी तिरंगा होना चाहिए, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा। इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि इंसान उम्र से, शरीर से थकता है लेकिन मन से और विचारों से नहीं। उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि ‘मार्मिक’ ६२वें वर्ष में भी चिरयुवा है। ‘मार्मिक’ के साथ हम बड़े हुए, लेकिन फिर एक बार उसमें व्यंग्यचित्र चलते हुए दिखाई देते हैं कि परिस्थिति अभी भी वही है। यह कहते हुए उद्धव ठाकरे ने िंहदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के १९८० में बनाए गए व्यंग्य चित्र का उदाहरण दिया। समय बदला, इंसान बदले लेकिन परिस्थिति वही है। ऐसा वे व्यंग्यचित्र तत्कालीन परिस्थति पर चोट करनेवाले थे। उद्धव ठाकरे ने कहा कि केवल तिरंगा फहराना मतलब राष्ट्रभक्ति नहीं है, बल्कि मन की बेचैनी उजागर करना चाहिए और ऐसी बेचैनी को मन की वेदना को उजागर करने का काम व्यंग्य चित्रकार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यंग्य चित्रकारों के फटकारे से समाज और देश को दिशा मिलती रही है।
इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने देश में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के क्षेत्रीय पार्टियों के संबंध में दिए बयान की खबर लेते हुए कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करना लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि देश में एक संघीय राज्य व्यवस्था बनाई गई है। इसमें सभी राज्य हैं। ये घटक राज्य एक साथ आए और देश स्वतंत्र हुआ। जब ये सभी राज्य एक साथ मिल जाते हैं, तो इसे एक संघ कहा जाता है। फिर नड्डा को क्या कहना है? क्षेत्रीय दलों को समाप्त करना है तो क्या वे संघीय सरकार को समाप्त करना चाहते हैं? क्या आपकी राय देश के नागरिकों की राय है कि उन्हें एक संघीय राज नहीं चाहिए? इस पर चुनाव होना चाहिए। आप आज गद्दी पर बैठे हैं, इसलिए हम करें सो कानून, यह लोकतंत्र नहीं है। यह आजादी और उसका अमृत महोत्सव नहीं है। अमृत महोत्सव अमृत जैसा होना चाहिए। यदि अमृत महोत्सव के वर्ष में लोकतंत्र को मृत अवस्था में ले जाना है तो अमृत महोत्सव वैâसा?

अन्य समाचार