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आयुर्वेद की घटती ‘आयु’! …अब मोदी सरकार दवा कंपनी बेचने जा रही है

जब भी हिंदुस्थानी चिकित्सा की बात आती है तो आयुर्वेद का नाम सबसे पहले आता है। केंद्र सरकार की एक दवा कंपनी है जो आयुर्वेद की दवाएं बनाती हैं। मगर सुनने में आया है कि अब इस दवा कंपनी की सरकारी ‘आयु’ घटनेवाली है। दरअसल, सरकार इस कंपनी को निजी क्षेत्र को बेचने जा रही है।
असल में, सरकारी कंपनियों को बेचने की दिशा में अब मोदी सरकार ने दवा कंपनी पर अपनी निगाहें इनायत की है। इसके तहत वह सार्वजनिक क्षेत्र की दवा कंपनी ‘इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (आईएमपीसीएल) को बेचने जा रही है। इसके लिए रणनीतिक बिक्री के लिए कई अभिरुचि पत्र भी प्राप्त हुए हैं। खबर है कि बैधनाथ जैसी कंपनी ने इसमें रुचि दिखाई है। निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) में सचिव तुहिन कांत पांडेय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर की गई एक पोस्ट में इस बात को स्वीकार किया है कि मोदी सरकार इस कंपनी को बेचने जा रही है। इस कंपनी को आईएमपीसीएल के रणनीतिक विनिवेश के लिए कई अभिरुचि पत्र प्राप्त हुए हैं। लेनदेन अब दूसरे चरण में जाएगा। दूसरे चरण में उचित जांच-पड़ताल के बाद वित्तीय बोलियों के लिए अनुरोध प्रस्ताव शामिल होंगे। इस कंपनी के लिए प्रारंभिक बोली लगाने की अंतिम तिथि ३० अक्टूबर थी। आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत संचालित आईएमपीसीएल में केंद्र सरकार की ९८.११ प्रतिशत हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी उत्तराखंड सरकार के उपक्रम कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड के पास है जो अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहता है। आईएमपीसीएल विभिन्न प्रकार की बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाएं बनाती है। यह राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत सभी राज्यों और जन औषधि केंद्रों को इन दवाओं की आपूर्ति करती है।

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