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साहेब को समर्पित : आज हिंदूहृदयसम्राट के प्रति समर्पण का दिन है … शिवसेनाप्रमुख के आह्वान के प्रति जागने का वक्त!

सुकुमार आण्णाप्पा किलेदार
शिवसैनिक, सांगली

हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे का व्यक्तित्व हर किसी को प्रभावित करता है। उनकी बेबाक छवि, उनका स्पष्ट नजरिया और राष्ट्र एवं महाराष्ट्र को खड़ा करने में उनका संघर्ष व राजनैतिक संगठन कौशल उन्हें एक लोकप्रिय नेता बनाता है। प्रांतीय अस्मिता और लोकाधिकार की उन्होंने हमेशा वकालत की। यही वजह है कि शिवसैनिक चाहे महाराष्ट्र का हो या समर्थक इतर हिंदुस्थान का, सभी ने शिवसेनाप्रमुख को एक आदर्श के रूप में माना। आज यहां हम ऐसे ही दो अलग-अलग अनुभवों को साझा कर रहे हैं, ताकि शिवसेनाप्रमुख के संकल्प का यथार्थ चित्रण हो सके।

१९८६ में हमारा परिवार मुंबई के घाटकोपर में आ गया और मैंने एक शिवसैनिक के रूप में काम करना शुरू किया। उसके बाद नई मुंबई जाने के बाद, तासगांव तालुका में अन्य लोगों की मदद से जमीनी स्तर पर हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठकरे के विचारों को स्थापित करने और `जहां गांव, वहां शाखा’ की स्थापना के लिए काम किया। एक शिवसैनिक के रूप में हमने मुंबई, नई मुंबई और तासगांव तालुका में हर चुनाव में बिना किसी पद की उम्मीद किए पूरी भावना के साथ प्रचार किया। पश्चिम महाराष्ट्र के तत्कालीन संपर्क नेता, मुंबई के पूर्व महापौर और शिवसेना नेता आदरणीय शरदभाऊ आचार्य साहेब तक पहुंचा, उन्होंने मुझे बुलाया और मुझसे पूछताछ की। शरदभाऊ आचार्य साहेब ने मुंबई, नई मुंबई और सांगली, सातारा और कोल्हापुर के ठाणे में रहने वाले अधिकारियों, शिवसैनिकों तथा शुभचिंतकों को दादर के शिवसेना भवन में एक बैठक आयोजित करने के लिए कहा।
सभा के सफल समापन के बाद शरदभाऊ आचार्य साहेब हमें शिवसेनाप्रमुख से मिलवाने ले गए। शिवसेनाप्रमुख से मिलने के बाद पहली ही नजर में मुझे उनके दिल में आम शिवसैनिकों के प्रति प्यार और गर्मजोशी का अहसास हुआ, उनकी आंखों में मातृ और पितृ प्रेम का अहसास हुआ।
उसी समय, जब शरदभाऊ आचार्य साहेब सभी शिवसैनिकों का परिचय करा रहे थे, आचार्य साहेब ने माननीय शिवसेनाप्रमुख को मेरे द्वारा संगठन के प्रति किए जा रहे कार्यों के बारे में संक्षेप में बताया। उसके बाद आचार्य साहेब ने शिवसेनाप्रमुख के आदेश पर मुझे तसगांव तालुका संपर्कप्रमुख नियुक्त किया गया।
तासगांव तालुका संपर्कप्रमुख के रूप में नियुक्त होने के बाद, तासगांव तालुका और सांगली जिला संपर्क नेता शरदभाऊ आचार्य साहेब के साथ भ्रमण करते थे। तालुकाओं का लगातार दौरा करते हुए वे चुनावों और अन्य आयोजनों के दौरान विपक्ष द्वारा की जाने वाली आलोचनाओं का जोरदार जवाब देते थे। समय-समय पर पत्रक निकालकर पार्टी की भूमिका और वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने लाते। महाराष्ट्र के प्रति शिवसेनाप्रमुख के जुनून को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने कृष्णा खोरे विकास निगम की स्थापना, इसकी भूमिका और इस योजना पर किए जा रहे कार्यों के बारे में जनता को सूचित करने की पहल की, जो पश्चिमी महाराष्ट्र के लिए एक वरदान है। इसके परिणामस्वरूप तासगांव तालुका में पहली बार पंचायत समिति के लिए दो सदस्य चुने गए।
हालांकि, यहां पर शिवसेनाप्रमुख के बारे में एक बात जानबूझकर बतानी जरूरी है कि लगभग २००१/०२ के दौरान, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। उस वक्त केंद्र सरकार ने मांग की थी कि पाकिस्तान मोस्ट वांटेड २० आतंकियों को भारत को सौंप दे। ये मांग करने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन रेल मंत्री जावेद अशरफ ने भारत को संबोधित करते हुए कहा, `आप हमसे किस तरह के उग्रवादियों की मांग करते हैं?’
आप शिवसेनाप्रमुख को पाकिस्तान को सौंप दो। ऐसी हास्यास्पद मांग के बाद हमने इसका विरोध किया और नेरुल, नई मुंबई में पाकिस्तान के रेल मंत्री जावेद अशरफ के पुतले और पाकिस्तान के झंडे जलाकर होली मनाई। उसी वक्त हमें गिरफ्तार कर लिया गया। यह समाचार सामना और अन्य दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशन के बाद शिवसेनाप्रमुख ने हमें मातोश्री में बुलाया और हमारी प्रशंसा की। हालांकि, उपरोक्त आंदोलन का भारत, महाराष्ट्र, मुंबई में कहीं भी विरोध नहीं हुआ था। शिवसेनाप्रमुख ने `शिवाजी पार्क’ की सार्वजनिक बैठक में खेद व्यक्त किया। यह उल्लेख करते हुए कहा कि उक्त आंदोलन केवल नई मुंबई में हुआ था, उन्होंने हमारे पदाधिकारियों और शिवसैनिकों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की। ऐसा दुर्लभ नेता ढूंढ़ना मुश्किल है, जिसका आम कार्यकर्ता, शिवसैनिक के प्रति आत्मीयता और स्नेह हो। धन्य हैं बालासाहेब!
आज २३ जनवरी को महान नेता का जन्मदिन है। आज भले ही वे नहीं हैं, पर आज उनकी मौजूदगी जरूरी है। मुझे, शिवसैनिकों के लिए अपने आखिरी भाषण में शिवसेनाप्रमुख ने जो कहा था, वह अक्षरश: याद है। उन्होंने कहा था, `आज तक मेरा ख्याल रखा, उद्धव का ख्याल रखना, आदित्य का ख्याल रखना… जय हिंद! .. जय महाराष्ट्र!’… आज उनके आह्वान के प्रति जागने का वक्त है… समर्पण का दिन है… उनकी जयंती के अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम!

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