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छिंदवाड़ा की प्राकृतिक राखियों की मांग बढ़ी …आदिवासी महिलाओं ने छिंद की पत्तियों से तैयार किए रक्षा सूत्र

इमरान खान / छिंदवाड़ा

रक्षा बंधन भाई-बहन के प्यार और विश्वास का अटूट पर्व है। ये पर्व तब और खास हो जाता है जब रक्षा सूत्र प्राकृतिक हो और साथ ही स्थान विशेष की पहचान से भी जुड़ा हो।

मान्यता है कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का नाम छिंद से बना है क्योंकि यहां छिंद के वृक्ष बहुतायत में पाए जाते हैं। छिंद का वृक्ष दिखता तो खजूर के पेड़ की तरह है लेकिन इसके फल खजूर से कम गुदेदार और अलग स्वाद के होते हैं। ये फल काफी फायदेमंद भी होते हैं। अब इसी छिंद की पत्तियों से छिंदवाड़ा मे प्राकृतिक राखियां बनाई जा रही है जिसकी गुणवत्ता लोगों को काफी पसंद आ रही है।

छिंदवाड़ा जिले का पहाड़ी क्षेत्र तामिया विख्यात पर्यटन स्थल है। ये पारंपरिक औषधियों के लिए भी जाना जाता है। तामिया के एक प्रकृति प्रेमी पवन श्रीवास्तव ने छिंद के पौधों की पत्तियों से रक्षा सूत्र बनाए हैं। जो इस रक्षा बंधन पर्व पर काफी पसंद किए गए। इससे स्थानीय आदिवासी परिवार की महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है साथ ही छिंदवाड़ा की पहचान और नाम भी चरितार्थ हो रहा है। इस बार छिंद की प्राकृतिक राखी की बाजार में काफी मांग रही।

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