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नवरात्रि में बढ़ी फूलों की मांग… खिलखिला उठे किसान!

• फूलों का मिल रहा अच्छा भाव
• गेंदा, गुलाब, मोगरा का उत्पादन

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
गणेश उत्सव और नवरात्रि पर्व में फूलों की काफी मांग रहती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए पालघर जिले के किसानों ने इस साल भी बड़े पैमाने पर फूलों की खेती की है। इसका उन्हें फायदा होता दिख रहा है। असल में नवरात्रि शुरू होने से पहले ही फूलों की मांग में उछाल आया था। ऐसे में किसानों को नवरात्रि में फूलों का अच्छा भाव मिल रहा है, जिससे किसान खिलखिला उठे हैं।
पालघर के दहानू, वसई, वाडा, विक्रमगढ़, वानगांव जैसे क्षेत्रों में गेंदा का फूल, गुलाब, मोगरा समेत अन्य फूलों का उत्पादन होता है। नवरात्रि से लेकर दिवाली तक फूलों की ज्यादा मात्रा में मांग रहती है।
गौरतलब है कि इस साल महाराष्ट्र और पूरे देश में बिना किसी प्रतिबंध के नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। ऐसे में फूलों की मांग बढ़ गई है। जिले के फूल गुजरात, दादर फूल मार्वेâट समेत कई शहरों के बाजारों में भेजे जाते हैं। बड़ी संख्या में व्यापारी फूल खरीदने के लिए पालघर जिले में पहुंच रहे हैं।

गेंदे का भाव १२० रुपए किलो तक
पालघर में किसानों के खेत फूलों से खिल रहे हैं। ये रंग-बिरंगे फूल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। किसानों को गेंदे के फूल का १२० रुपए प्रति किलो रेट मिल रहा हैं, जबकि मोगरे का रेट ६०० रुपए से ८०० रुपए तक है।

हजारों लोगों को मिलता है रोजगार
पालघर जिले में करीब डेढ़ हजार एकड़ में फूलों की खेती होती है। इससे हजारों आदिवासियों को भी रोजगार मिलता है, जो फूलों की खेती में लगातार काम करते हैं।

करोड़ों का फूल पहुंचता है दादर
पालघर से महीने में करोड़ों का फूल दादर के फूल बाजार में जाता है। किसानों का कहना है कि गणेशोत्सव, दशहरा, नवरात्रि, दीपावली, शादी-विवाह जैसे सीजनों में फूलों की ज्यादा मांग रहती है। इससे उन्हें ठीक-ठाक मुनाफा हो जाता है।

• फूलों की भारी मांग होने से बाजार में फूल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका फायदा फूल की खेती करने वाले किसानों को मिल रहा है।
-त्रिलोकी पाठक, फूल व्यापारी
• नवरात्रि, दशहरा, दीपावली में फूलों की ज्यादा डिमांड होती हैं। इस साल भारी बारिश के कारण फूल की खेती को काफी नुकसान पहुंचा था। इसकी वजह से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में रेट अच्छा मिलने से मुनाफा मिलने की उम्मीद है।
-वैभव पाटील, किसान

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