मुख्यपृष्ठनए समाचारसत्ता परिवर्तन से ही बचेगा देश में लोकतंत्र - पूर्व जस्टिस कोलसे...

सत्ता परिवर्तन से ही बचेगा देश में लोकतंत्र – पूर्व जस्टिस कोलसे पाटील

सामना संवाददाता / नागपुर
केंद्र में जबसे भाजपा की सरकार बनी है वह अपनी नीतियों की वजह से हर तरफ आलोचना झेल रही है। केंद्र विपक्षी पार्टियों से बिना सलाह लिए तानाशाही तरीके से नए-नए कानून और नियम लागू करके संविधान में छेड़छाड़ कर रही है। केंद्र सरकार की इन्हीं नीतियों को लेकर पूर्व जस्टिस कोलसे पाटील ने हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि संविधान की संवैधानिक समिति में रहते हुए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भारतीय संविधान को तैयार करने के लिए बहुत कष्ट उठाया, लेकिन केंद्र के सत्ताधारियों को स्वीकार्य नहीं है। पूर्व न्यायाधीश कोलसे पाटील ने कहा कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन होने पर दलित और बहुजन समाज के एक साथ आने से ही देश में लोकतंत्र बचेगा।
बता दें कि सिविल स्थित देशपांडे हॉल में आयोजित ओरिएंटेशन कॉन्प्रâेंस में डॉ. कोलसे पाटील ने अपने अध्यक्षीय भाषण में आर्थिक लोकतंत्र पर बाबासाहेब आंबेडकर के विचार पर आधारित केंद्र सरकार की नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि फुले, शाहू और आंबेडकर ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि गरीबों के बच्चों को शिक्षा मिले। शिक्षा के बिना लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता, लेकिन पैसा नहीं होने के कारण केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा पर पैसा खर्च नहीं कर रही हैं। देश के एक प्रतिशत लोगों के पास ४० प्रतिशत संपत्ति है। अगर इनसे कॉरपोरेट टैक्स वसूला जाए तो २५ से ३० लाख करोड़ का फंड आसानी से जमा हो सकता है। पूर्व जासटिस ने कहा कि अमेरिका सहित विकसित देशों में शिक्षा पर ५० से ७५ प्रतिशत तक खर्च किया जाता है, लेकिन हमारे देश में शिक्षा के दरवाजे आम लोगों के लिए बंद किए जा रहे हैं। इसके खिलाफ संगठित होने की जरूरत है। इस दौरान उपस्थित लेखक जे. वि. पवार ने कहा कि इतिहास से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम न मिटे, इसके लिए नागपुर में रिपब्लिकन पार्टी को फिर से स्थापित किया जाना चाहिए, इसमें ओबीसी तत्वों को शामिल किया जाना चाहिए। शिक्षा नीति लागू करते समय नए प्रयोग नहीं किए गए। पिछले कई वर्षों से कुछ वर्गों के प्रभुत्व की नीति लागू की गई है। पवार ने विश्वास जताया कि अगर देश के ओबीसी और दलित एक साथ आ जाएं तो कोई बदलाव नहीं होगा।

अन्य समाचार