मुख्यपृष्ठनए समाचारलोकतंत्र हुआ लज्जित!... चरम पर मोदी सरकार की तानाशाही, पूरा ‘विपक्ष’ सस्पेंड!

लोकतंत्र हुआ लज्जित!… चरम पर मोदी सरकार की तानाशाही, पूरा ‘विपक्ष’ सस्पेंड!

सामना संवाददाता/ मंबई

कल ४९ सांसद निलंबित किए गए
अब तक १४१ सांसद निलंबित

संसद भवन पर १३ दिसंबर को हुए स्मोक बम हमले का असर दोनों सदनों की कार्यवाही की दौरान लगातार तीसरी दिन भी देखा गया। विपक्ष मोदी सरकार की जमकर आलोचना कर रहा है कि मोदी सरकार ने महज तीन दिनों में १४१ सांसदों को निलंबित कर विपक्ष मुक्त संसद का सपना साकार कर दिया है। सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी सरकार की तानाशाही का विरोध करते हुए विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। विपक्ष ने सचमुच सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। विपक्ष ने मांग की है कि गृह मंत्री अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए और घटना की जिम्मेदारी लेते हुए दोनों सदनों में घटना पर बयान देना चाहिए।
विपक्ष के विरोध को देखते हुए मंगलवार को और ४९ सांसदों को निलंबित कर दिया गया। इस तरह देश के इतिहास में पहली बार कुल १४१ सांसदों को निलंबित कर दिया गया। विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ कड़े शब्दों में गुस्सा जाहिर करते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने सचमुच लोकतंत्र की नींव को नष्ट कर दिया है और संसद की गरिमा का अपमान किया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि संसद में सवाल पूछना अब अपराध हो गया है। इससे पहले विपक्ष ने सदन में यह मांग कर हंगामा किया कि सांसदों के निलंबन पर चर्चा होनी चाहिए और सुरक्षा के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदनों में निवेदन प्रस्तुत करें और इस्तीफा दें। इसलिए संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सांसदों के निलंबन का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे राजेंद्र अग्रवाल ने मंजूरी दे दी। कांग्रेस समेत विपक्ष ने आलोचना की कि मोदी सरकार ने संसद की मर्यादाओं का उल्लंघन किया है और लोकतंत्र की बेरहमी से हत्या की है। इस बीच सांसद कार्ति चिदंबरम समेत कई सांसदों ने इस बात पर अफसोस जताया कि जब नियमों का उलंघन नहीं हुआ तो भी मनमाने तरीके से उनका निलंबन किया गया, जबकि उन्होंने वेल में आकर न तो नारे लगाए और न ही पोस्टर और तख्तियां ही दिखार्इं।
संसदीय लोकतंत्र की रक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं सत्ताधारी – शरद पवार
संसद पर स्मोक बम हमला करनेवाले कौन थे? उनका इरादा क्या था? उन पर क्या कार्रवाई करेंगे, इसकी जानकारी गृह मंत्री सदन में आकर दें। इस तरह की मांग विपक्ष की थी। लेकिन उनपर ही कार्रवाई की गई। इस तंत्र को संभालने की जिम्मेदारी जिन पर थी उन पर कार्रवाई नहीं होती है लेकिन जो हुआ उसकी जानकारी मांगने पर सांसदों पर ही कार्रवाई की गई। इसका मतलब यह है कि यह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और सुरक्षा के प्रति सत्ताधारियों के गंभीर न होने का उदाहरण है। इन शब्दों में शरद पवार ने सांसदों के निलंबन पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। सांसदों ले निलंबन के मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ख़ड़गे ने कहा कि मोदी सरकार देश में लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है।

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