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अभिलाषा

एक पर्व की तरह
पर्यावरण दिवस हो,
जिसमें उत्साह हो उमंग हो
खुशियों का तरंग हो,
हर जन के मन में
प्रकृति की सुरक्षा का स्मरण हो।
ना होली की तरह शोर-शराबा
ना दीवाली की तरह प्रदूषण हो,
ना जल-प्रदूषण, ना ध्वनि प्रदूषण
लो शपथ मिलकर आज यह
कि ऐसा सुंदर वातावरण हो।
ना अंध-पूजा की बली की तरह
ना ही बकरी-ईद की तरह
हर हिंसा से मुक्त, अहिंसा से युक्त हो,
लो शपथ मिलकर आज यह
कि ऐसा शुद्ध पर्यावरण हो।
कोई एक-दो गांव नहीं
कोई एक-दो राज्य नहीं
अपितु समूचे देश का त्योहार है,
केवल एक देश का नहीं
यह संपूर्ण विश्व का त्योहार है।
ना हिंदू ना मुस्लिम
ना सिख, ना ईसाई
यह हर धर्म का त्योहार है,
प्रकृति हमारी जननी है
उस पर सबका हक समान है।
इस छोटे से पहल को
अभियान का एक नया रूप दो,
प्रकृति के अमूल्य खजाने को
ना व्यर्थ करो, ना भक्षण हो,
लो शपथ मिलकर आज यह
कि पर्यावरण संरक्षण हो।
-पूजा पांडेय, मुंबई