मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनानाश नशे का तत्काल करो 

नाश नशे का तत्काल करो 

मैं धरती हिंदुस्थान की
मेरी ही कोख से उत्पन्न जवानी,
नाश कर रही तरुणाई अपनी
न जाने कैसे कैसे नशे में जलकर,
खुद की रग में भर कर विष को
मेरी ममता को लज्जित कर रही।
जिसके बाहुबलियों ने रक्षा हेतु
सदियों से मुझ पर सदा
जान अपनी कुर्बान की,
उसी हिंदुस्थानी का ह्रदय अब
नशे के लिए व्याकुल है।
बनना था जिस युवा को
देश का कर्णधार बलवान,
नशे में जकड़ा जा रहा आज
वो युवा लाडला है मेरा ही।
जिस पल्लवित पदेश को
पराजित करने में विफल हुई,
शत्रु की सेना विशाल भी,
उसी हिंदुस्थानी को हराने की खातिर,
छ्द्म युद्ध में चक्रव्यूह नशे का
शत्रु देश ने आज रचाया है।
होगी कोई कमी मेरी ही,
जो संतान अपनी का
लालन पालन करने में चूक गई,
मेरी अस्मत को लुटते देख,
नशे में क्षीण हीन तरुणाई है,
बुरा इतना क्या था भाग्य मेरा
जो मुझको सजा हर बार मिल रही।
मैं धरती हिंदुस्थान की
चीख चीख पुकार रही,
अवतारों की धरती पर
नाश नशे का तत्काल करो।

मुनीष भाटिया
मोहाली-पंजाब 

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