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शैतान ‘ड्रैगन’ का बादल बम! दूसरे देशों का मौसम कर सकता है हाइजैक

  • सौ करोड़ डॉलर कर चुका है खर्च
  • केमिकल से बना रहा है कृत्रिम बादल
  •  ३५ हजार लोग कर रहे हैं प्रॉजेक्ट पर काम

एजेंसी / बीजिंग
चीन अपनी चालबाजी से कभी बाज नहीं आ सकता है। इस बीच वो कुदरत को भी चुनौती देने का नया खेल खेलने की तैयारी में जुटा है। वह ‘बादल बम’ बनाने के प्रयासों में जुटा है। चीन की फितरत को देखते हुए इससे दूसरे देशों के मौसम को हाइजेक किए जाने की आशंका सताने लगी है। धरती की सुरक्षा और भविष्य के खतरों पर गौर करें तो ये कोई छोटा-मोटा बम नहीं है। अपने इस नए बम के जरिए चीन असीम ब्रह्मांड को मुट्ठी में करना चाहता है। जिनपिंग के बादल-बमों को Aऊध्श् बम से कम मत समझिए। ड्रैगन के ये बम दूसरे देशों के लिए तबाही बन सकते हैं। बादलों में विस्फोट कराकर चीन बिना मौसम के बारिश कराने के लिए पैसा पानी की तरह बहा रहा है। आखिर कुदरत पर लाल अत्याचार करने पर क्यों आमादा है ड्रैगन? क्या है बीजिंग का नया ेंAR प्लान है? देखिए ये स्पेशल रिपोर्ट…
बता दें कि चीनी अधिकारी वर्षों से क्लाइमेट मैनीपुलेशन प्रोग्राम यानी पर्यावरण में हेरफेर करने वाले कार्यक्रमों पर लगातार शोध में लगा हुआ है। अपनी इस ‘बादल बम’ यानी कृत्रिम बारिश योजना पर ड्रैगन अब तक करीब सौ करोड़ डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है। उसके इस प्रॉजेक्ट पर करीब ३५ हजार लोग काम कर रहे हैं। उसके शासकों की योजना २०२५ तक देश के ५५ लाख वर्ग किमी इलाके को कृत्रिम बारिश या बर्फ के प्रोग्राम के तहत कवर करने की है। यह चीन के कुल क्षेत्रफल का करीब ६० फीसदी बैठता है।
फिलहाल अपने दक्षिण-पश्चिम प्रांतों में अभूतपूर्व भीषण गर्मी और सूखे से परेशान ड्रैगन शरद ऋतु की अपनी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारी कर रहा है। इससे आस-पास के दूसरे देशों को अपने क्षेत्र में वर्षा चक्र के गड़बड़ाने का खतरा महसूस होने लगा है।
पहले भी हो चुका है दुरुपयोग
सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कृत्रिम बारिश की योजना समस्या के समाधान के लिए कारगर उपाय सिद्ध हो सकती है। लेकिन चीन की खुराफाती फितरत के कारण विज्ञान के इस चमत्कार से लोगों को डर भी लग रहा है। जैसे कि १९६७-१९७२ तक चले वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने ऑपरेशन पोपोय चलाया था। अमेरिकी सेना ने वियतनाम में क्लाउड सीडिंग के जरिए अपनी मर्जी से बारिश कराते हुए दुश्मन सेना को भारी नुकसान पहुंचाया था। वर्ष २००८ के जुलाई-अगस्त महीने में चीन की राजधानी बीजिंग में ओलिंपिक चल रहा था। मौसम विभाग ने मैच के दिन बारिश की आशंका जाहिर की। इससे बचने के लिए चीन ने मैच के एक दिन पहले ही कृत्रिम बारिश, यानी आर्टिफिशियल रेन करवाकर बादलों को खाली कर दिया था। इसी तरह पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के मंडी जिले में बादल फटने की घटनाओं के पीछे विदेशी ताकतों (चीन) की साजिश की आशंका जताई गई थी। लेह-लद्दाख और उत्तराखंड में भारी बारिश के लिए भी ड्रैगन को जिम्मेदार माना गया था। ८ जुलाई २०२२ को जम्मू-कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई बाढ़ में १६ लोगों की मौत हो गई, जबकि ४० अभी भी लापता हैं।

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