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दुनिया में हावी हो रही है तानाशाही! उदार लोकतंत्रवाले देश ४१ से घटकर हुए ३२

  • चीन ने सबसे ज्यादा की चालाकी

    एजेंसी / नई दिल्ली

    दुनिया में आम जनता के अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि सत्ताधारियों की तानाशाही प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। दुनिया की अवस्था वर्ष १९८९ जैसी हो गई है अर्थात पिछले एक दशक में उदार लोकतंत्र यानी लोकतांत्रिक माने जानेवाले देशों की संख्या ४१ से घटकर ३२ रह गई है। जबकि निरंकुश या निर्वाचित का दर्जा प्राप्त देशों की संख्या पुन: ८७ हो गई है।
    इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा २०२१ के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि दुनिया की केवल ८.४ फीसदी आबादी पूरी तरह से प्रभावी लोकतंत्र में रहती है, इस बदलाव को ‘लोकतांत्रिक मंदी’ के रूप में संदर्भित किया जा रहा है। कई लोगों, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते जैसे नेताओं ने इस प्रवृत्ति को बढ़ाने में योगदान दिया है, लेकिन इसमें चीन सबसे ज्यादा चालाकी दिखा रहा है। पिछले कई वर्षों से बीजिंग संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में सार्वभौमिक मानवाधिकारों के विचार पर सवाल उठाता रहा है। चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार को लेकर संयुक्त राष्ट्र की जिस रिपोर्ट का लंबे समय से इंतजार हो रहा था, वह जारी हो गई है। रिपोर्ट में यूएन ने चीन पर ‘मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन’ का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन में उइगर मुस्लिमों और दूसरे एथनिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है। मानवाधिकार समूहों का अनुमान है कि अकेले नॉर्थ-ईस्ट चीन के शिनजियांग प्रांत में १० लाख से ज्यादा लोगों को डिटेंशन सेंटरों में केंद्र करके रखा गया है। डिटेंशन सेंटर में केंद्र करके रखे गए अल्पसंख्यकों की जबरन नसबंदी कर दी गई है। महिलाओं से रेप किया जाता है, उन्हें दवाइयां दी जाती हैं, इसके बावजूद गर्भवती होनेवाली महिलाओं की नसबंदी कर दी जाती है।

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