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घाती सरकार की तानाशाही : आंगनवाड़ी सेविकाओं के घरों पर चिपकाया नोटिस …४८ घंटे में काम पर हाजिर होने का फरमान …नहीं तो चली जाएगी नौकरी

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते एक महीने से राज्यव्यापी हड़ताल पर हैं। उनके इस हड़ताल को समाप्त कराने के लिए चार दिन पहले घाती सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रालयीन प्रशासन के बीच जोर-शोर से बैठक तो हुई, लेकिन वह बेनतीजा रही। हालांकि, इसके बाद घाती सरकार तानाशाही का रास्ता अपना चुकी है और प्रशासनिक स्तर पर आंगनवाड़ी सेविकाओं के घरों की दीवारों पर नोटिस चस्पाया है। साथ ही ४८ घंटे के भीतर काम पर हाजिर होने का फरमान जारी करते हुए कहा गया है कि वापस काम पर न लौटने पर नौकरी चली जाएगी। इसके खिलाफ कल बेलापुर स्थित रायगड भवन में आयुक्त कार्यालय पर बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं इकट्ठा हुर्इं और थाली नाद मोर्चा निकलकर सरकार की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उल्लेखनीय है कि आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं चार दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते तीन से छह साल तक के बच्चों को भोजन और शिक्षा मिलने
में दिक्कत आ रही है। इतना ही नहीं ग्रामीण, आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलना बंद हो गया है। इससे कुछ हद तक राहत पाने के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत आशा सेविका, पुलिस पाटील, मध्याह्न भोजन कर्मचारियों को शिक्षा और भोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, आंगनवाड़ी कर्मचारी केंद्रों को सौंपने पर विरोध जता चुके हैं। दूसरी तरफ बीते ३६ दिनों के बाद भी घाती सरकार ने आंगनवाड़ी सेविकाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनका दमन करना शुरू कर दिया है। हालांकि, सरकार के इस दमनकारी नीति के बावजूद वे नहीं झुकीं और ज्ञानज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती के मौके से १० हजार से अधिक आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। संगठन के महासचिव बृजपाल सिंह ने बताया कि इसे लेकर मुख्यमंत्री और प्रशासनिक स्तर पर बैठकें हुर्इं, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। हालांकि, हमें ही दबाने की कोशिश जा रही है।
काम पर लौटने का बनाया जा रहा दबाव
संगठन के महासचिव बृजपाल सिंह ने बताया कि जिला स्तर पर परियोजना कार्यालय ने इन कर्मियों के घर पर नोटिस चिपकाकर ४८ घंटे के अंदर उपस्थित होने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बीते दिनों एकीकृत बाल विकास सेवा योजना परियोजना कार्यालय के अधिकारियों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को काम पर आने के लिए नोटिस जारी कर दिया। नोटिस लेने से इंकार करनेवाली आंगनवाड़ी सेविकाओं के घरों पर ४८ घंटे के अंदर हाजिर होने का नोटिस चस्पाया गया। हालांकि, इस नोटिस के बावजूद सेविका-सहायिकाओं की हड़ताल जारी है।
कल आयुक्त कार्यालय पर हुआ थाली नाद मोर्चा
संगठन ने महासचिव बृजपाल सिंह ने कहा कि आंगनवाड़ी सेविकाओं को अवैध नोटिस देने के खिलाफ और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर मुंबई जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का बेलापुर स्थित रायगड भवन के आयुक्त कार्यालय पर कल दोपहर १२ बजे थाली नाद मोर्चा निकाला गया, जिसमें मुंबई जिले, नई मुंबई, ठाणे शहर और पनवेल परियोजना से बड़ी तादाद में न केवल सेविकाओं ने हिस्सा लिया, बल्कि सरकार की दमनशाही नीति के खिलाफ नारेबाजी भी की।
प्रदेश में हैं दो लाख आंगनवाड़ी सेविकाएं
महिला एवं बाल विकास विभाग की एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत लगभग १ लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में दो लाख आंगनवाड़ी सेविकाएं काम कर रही हैं। इनमें से लगभग ९७ परियोजनाएं आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। आंगनवाड़ी सेविकाओं की स्थिति वैधानिक है और उन्हें संविधान के अनुच्छेद ४७ में निहित कर्तव्यों को पूरा करने के लिए नियुक्त किया जाता है।

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