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सेहत का तड़का : डाइट डार्लिंग …मोना सिंह ने खान-पान के अनुशासन से साधी सेहत

एस.पी. यादव

तकरीबन २० साल पहले धारावाहिक ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ के मुख्य किरदार के रूप में घर-घर में अपनी विशेष पहचान कायम करनेवाली अभिनेत्री मोना सिंह का जन्म ८ अक्टूबर १९८१ को चंडीगढ़ में एक सिख परिवार में हुआ। अभिनय के अलावा मॉडल, नृत्यांगना, कॉमेडियन और टेलीविजन प्रस्तोता के रूप में अपनी साख बनानेवाली मोना सिंह अपनी सदाबहार फिटनेस के लिए भी विख्यात हैं। अपनी फिटनेस का श्रेय वह अपने खान-पान के अनुशासन को देती हैं।

आर्मी अफसर पिता की जगह-जगह नियुक्तियों के चलते मोना सिंह के बचपन का अधिकांश हिस्सा हिंदुस्थान के कई प्रांतों में बीता, लेकिन महाराष्ट्र के नागपुर और पुणे शहर में उन्होंने लंबा समय बिताया। बचपन से ही अभिनेत्री बनने का सपना देखनेवाली मोना सिंह ने केंद्रीय विद्यालय वायुसेना नगर, नागपुर से स्कूली पढ़ाई की और पुणे के सेंट मीरा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। २००३ में धारावाहिक ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ से उन्होंने अभिनय शुरू किया और अपार लोकप्रियता हासिल की। नृत्य में निपुण मोना २००६ में डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा’ के पहले सीजन की विजेता बनी। ‘राधा की बेटियां कुछ कर दिखाएंगी’, `क्या हुआ तेरा वादा’, `प्यार को हो जाने दो’ जैसे धारावाहिकों के अलावा उन्होंने ‘थ्री इडियट्स’ और ‘लालसिंह चड्ढा’ जैसी फिल्मों में काम किया। ‘ये मेरी फैमिली’, ‘कहने को हमसफर हैं’, ‘मेड इन हेवन’ जैसी वेबसीरिज में उल्लेखनीय किरदार निभाए। २७ दिसंबर २०१९ को उन्होंने फिल्म निर्माता श्याम राजगोपालन से विवाह किया और इन दिनों ओटीटी की दुनिया में व्यस्त हैं।

सेहत के नाम हर दिन व्यायाम
मोना का मानना है कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन अपनी सेहत के लिए कुछ समय जरूर निकालना चाहिए। वह रोज सुबह लगभग दो घंटे व्यायाम करती हैं। लगभग घंटे भर मॉर्निंग वॉक, रनिंग, सूर्य नमस्कार, योग और प्राणायाम करने के बाद वे जिम जाती हैं, जहां वह कार्डियो एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती हैं। इसके बाद कुछ देर तक मेडिटेशन और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करती हैं।

खान-पान का विशेष ध्यान
मोना सिंह अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देती हैं। मीठा पसंद होने के बावजूद मिठाई, जंक-फूड और तैलीय भोजन से परहेज करती हैं। सुबह दो गिलास पानी पीकर दिन की शुरुआत करती हैं। नाश्ते में टोस्ट ऑमलेट, कभी-कभार दलिया या सैंडविच और फ्रूट जूस लेती हैं। दोपहर के भोजन में दो चपाती, एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्जी, सलाद और दही शामिल होता है। वह छोटी-छोटी खुराकों में दिन में दो-तीन बार भोजन करती हैं। रात के भोजन में अक्सर सलाद और सूप शामिल होता है।

खाना बनाने में निपुण
मोना सिंह को खाना बनाना पसंद है। वे अक्सर घर पर नई-नई रेसिपी बनाती रहती हैं। मोना को बिरयानी पसंद है, लेकिन इसमें वे चावल की जगह क्विन्वा का इस्तेमाल करती हैं। उन्हें सरसों के साग के साथ मक्के की रोटी, कोकण शैली में बनी मछली-करी और झींगा, मशरूम, पालक की सब्जी के अलावा थाई व्यंजन पसंद है।

मोना की पसंदीदा सरसों के साग की रेसिपी
सामग्री: लगभग आधा किलो ताजी सरसों की पत्तियां, पाव किलो पालक, एक छोटी कटोरी घी, दो प्याज, एक टुकड़ा अदरक, लहसुन की पांच-छह कलियां, दो-चार हरी मिर्च, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच कॉर्नमील, दो चम्मच मक्खन और स्वादानुसार नमक।
विधि: सरसों और पालक की पत्तियों को बारीक काट लें। एक पैन में दो चम्मच घी गर्म करें। प्याज डालकर भूरा होने तक भूनें। अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर कुछ देर भूनें। इसमें सरसों के पत्ते और पालक डालकर कुछ मिनट तक भूनते रहें। नमक डालकर मध्यम आंच पर दस मिनट तक पकाएं। अब कॉर्नमील और पानी डालकर कुछ देर तक पकाएं। ठंडा होने पर इस मिश्रण को ब्लेंडर में डालकर गाढ़ा पीस लें। अब पैन में घी और मक्खन गर्म करें और उसमें इस मिश्रण को डालकर पांच-सात मिनट तक पका लें। इसे रोटी के साथ परोसें।
फायदे: यह कब्ज को दूर करने, पाचन-तंत्र को मजबूत करने में सहायक है। इसमें मौजूद विटामिन के और ओमेगा-३ पैâटी एसिड सूजन को कम करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और जलनरोधी तत्व वैंâसर होने से बचाते हैं। विटामिन ए, के, सी और ई के अलावा इसमें मैंगनीज और फोलेट होता है, जिसके चलते अस्थमा, हृदय रोग और रजोनिवृत्ति के लक्षणों से पीड़ित लोगों को इसके सेवन से काफी फायदा होता है।

(लेखक स्वास्थ्य विषयों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार व अनुवादक हैं। ‘स्वास्थ्य सुख’ मासिक के संपादक रह चुके हैं।)

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