मुख्यपृष्ठसमाचारभाजपा से मुकाबले की रणनीति में शामिल दिग्गी! ... १० जनपथ में...

भाजपा से मुकाबले की रणनीति में शामिल दिग्गी! … १० जनपथ में अहम फैसलों में राय ले रहीं सोनिया गांधी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
हाल ही में ५ राज्यों के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस हाईकमान पार्टी में बड़े फेरबदल की तैयारी में जुटा है। पार्टी में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की एंट्री को लेकर सोनिया गांधी के आवास १० जनपथ पर पिछले एक हफ्ते से बैठक हो रही है। इस बैठक में सोनिया और प्रियंका गांधी समेत कई नेता शामिल रहे। दिग्विजय सिंह को भी सोनिया ने इस बैठक में बुलाया। २०१७ के बाद दिग्गी की १० जनपथ में वापसी को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल पूरे पांच साल बाद दिग्विजय कांग्रेस के किसी बड़े फैसले में शामिल हो रहे हैं।
महासचिव पद से दिया था इस्तीफा
२०१७ में गोवा के प्रभारी रहते हुए कांग्रेस की सरकार न बना पाने के बाद दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद से ही दिग्विजय कांग्रेस के किसी बड़े पैâसले में शामिल नहीं रहे। वे इसके बाद से ही मध्य प्रदेश की पॉलिटिक्स में सक्रिय थे, जहां २०१८ में कांग्रेस की सरकार बनी थी। इसके अलावा दिग्विजय यूपी, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों के कांग्रेस प्रभारी रह चुके हैं। इन राज्यों में लोकसभा की करीब २५० सीटें हैं, जिसके सियासी गणित से दिग्विजय सिंह वाकिफ हैं। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि दिग्गी की संगठनात्मक पकड़ का फायदा अगले चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है।
फिर से सक्रिय हुई कांग्रेस टीम
बता दें कि राहुल की लगातार आलोचना के बाद फिर से कांग्रेस टीम सक्रिय हो गई है। ऐसे में उन्होंने अपने पुराने वफादार नेताओं से सलाह-मशविरा करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में दिग्विजय सिंह की कांग्रेस में वापसी हुई है। दिग्विजय सिंह के पास संगठन और सत्ता का बेहतर अनुभव है। पिछले कुछ साल में दिग्विजय सिंह ने धारणाओं को बदलने का काम किया है, उसका फायदा उन्हें मिला है।
दिग्गी ने की वापसी
दिग्विजय सिंह ने लगातार आलोचना के बाद २०१७ में कांग्रेस महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद दिग्गी पॉलिटिकल सन्नाटे में चले गए, लेकिन उन्होंने २०१८ की शुरुआत में नर्मदा यात्रा निकालकर फिर से कांग्रेस संगठन में पकड़ बनाने की कोशिश शुरू कर दी, उसमें वे सफल भी रहे। इस यात्रा के बाद कांग्रेस ने उन्हें मध्य प्रदेश में कोऑर्डिनेशन का जिम्मा सौंपा। २०१८ में एमपी में सरकार बनी, तो इसका भी क्रेडिट दिग्विजय सिंह को ही मिला।

अन्य समाचार