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दिल दा मामला है…महिलाओं का दिल दे रहा दगा! दिक्कत होने पर न करें देर, डॉक्टर से कराएं उपचार, नहीं तो जा सकती है जान

सामना संवाददाता / मुंबई
४५ साल तक की आयु वाली महिलाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों के मुताबिक, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में १० साल बाद कोरोनरी धमनी रोग विकसित होता है। लेकिन इसका स्वरूप अधिक गंभीर होता है। कई महिलाएं जिन्हें दिल का दौरा पड़ा है, उन्हें इसके बारे में पता ही नहीं होता है। ऐसे में पुरुषों की तरह ही महिलाओं का भी दिल कम उम्र में ही दगा देने लगा है। ऐसे में दिल में दिक्कत दिखाई देने पर बिना देर किए डॉक्टरों से उपचार कराने की सलाह विशेषज्ञ दे रहे हैं। इसमें थोड़ी भी कोताही बरतने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
कई अध्ययनों से पता चला है कि हर चार में से एक महिला हृदय रोग से पीड़ित है। हृदय की पंपिंग क्षमता में कमी से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसे ‘डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी’ कहा जाता है। ५५ वर्ष की आयु के बाद महिलाओं में इस बीमारी के विकसित होने का खतरा पांच गुना बढ़ जाता है। कार्डियोलॉजिस्टों के मुताबिक धूम्रपान, गलत जीवनशैली दिल के दौरे का कारण बन सकती है। इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यह है अनुवांशिक बीमारी
डॉ. नेताजी मुलिक ने कहा कि हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी एक अनुवांशिक बीमारी है, जो हृदय की मांसपेशियों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि दिल का दौरा तब पड़ सकता है, जब शरीर में लवण, विशेष रूप से पोटेशियम और मैग्नीशियम, खत्म हो जाएं।
लक्षणों पर ज्यादा ध्यान न देना
ज्यादातर महिलाओं को दिल की क्षति के बाद ही अस्पताल में भर्ती किया जाता है, क्योंकि ये लक्षण अक्सर दिल के दौरे से जुड़े नहीं होते हैं। ये लक्षण हृदय रोग से जुड़े गंभीर दर्द के बजाय हल्के हो सकते हैं। अक्सर महिलाएं घरेलू अथवा नौकरी संबंधी जिम्मेदारियों के कारण अपने स्वास्थ्य के साथ ही दिल की बीमारियों से जुड़े हल्के लक्षणों को भी नजरअंदाज कर देती हैं।
ये हैं लक्षण
महिलाओं को हृदय रोग के लक्षणों में सीने में दर्द या जलन, एक या दोनों हाथों के साथ ही बाएं कंधे में दर्द, गले या जबड़े में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या पसीना आना और थकान शामिल हैं। इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
रजोनिवृत्ति के बाद अधिक होता है खतरा
रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक होता है। रजोनिवृत्ति की प्रक्रिया सामान्य तौर पर ४५-५० वर्ष की उम्र के आसपास शुरू होती है। इस दौरान महिला के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। इस बीच एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। नतीजतन महिलाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

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