मुख्यपृष्ठस्तंभमोदी सरकार की कुटनीतिक हार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान से खाई मात!

मोदी सरकार की कुटनीतिक हार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान से खाई मात!

पाक बना यूनेस्को का कार्यकारी बोर्ड उपाध्यक्ष

एजेंसी / नई दिल्ली
भारतीय विश्व गुरु बनने का सपना देख रहे हैं, लेकिन ये सपना चकनाचूर होता नजर आ रहा है। देश को विश्व गुरु बनाने वाले प्रधानमंत्री मोदी की वूâटनीतिक हार हो गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये मात पाकिस्तान से मिली है। दरअसल, पाकिस्‍तान ने यूनेस्‍को के कार्यकारी बोर्ड के उपाध्‍यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में भारत को बंपर वोटों से मात दे दी। इस जीत के साथ एक तरफ जहां पाकिस्‍तान इस वैश्विक संस्‍था का उपाध्‍यक्ष बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्‍तान में यूनेस्‍को की सूची में शामिल शारदा पीठ मंदिर को ढहा दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्‍तान साल २०२३ से २०२५ के लिए एशिया प्रशांत ग्रुप की ओर से उपाध्‍यक्ष बना है। बताया जा रहा है कि ५८ सदस्‍यीय कार्यकारी बोर्ड में से ३८ ने पाकिस्‍तान को वोट दिया, वहीं भारत को मात्र १८ वोट मिले। यूनेस्‍को के कार्यकारी बोर्ड की प्रâांस की राजधानी पेरिस में बैठक हुई। इसी दौरान हुए चुनाव में पाकिस्‍तान को यह जीत हासिल हुई। इस जीत से उत्‍साहित पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके सभी सदस्‍यों को समर्थन देने के लिए धन्‍यवाद दिया है।

हिंदू मंदिर को ढहाया

पाकिस्‍तान ने दावा किया कि वह अपनी जिम्‍मेदारियों को पूरी जिम्‍मेदारी, आपसी सम्‍मान और विश्‍वसनीयता के साथ निर्वहन करेगा। पाकिस्‍तान ने कहा कि वह सभी सदस्‍य देशों के साथ सहयोग करेगा, जो संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर का उद्देश्‍य है। पाकिस्‍तान एक तरफ दावा कर रहा है कि वह यूनेस्‍को की जिम्‍मेदारियों का पालन करेगा, वहीं खुद उसके देश में सिंध प्रांत में हिंदुओं के हिंगलाज माता मंदिर को कोर्ट के कथित आदेश पर ढहा दिया गया। मंदिर को ढहा देने की यह कार्रवाई मीठी शहर में हुई है।

पाक ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार किया

एलओसी के पास स्थित हिंदू मंदिर शारदा पीठ को भी ढहाया गया है, जो यूनेस्‍को की सूची में शामिल है। पाकिस्‍तान ने ये मंदिर ऐसे समय पर गिराए हैं, जब पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि मंदिर की सुरक्षा हर कीमत की जाएगी। यही नहीं मंदिर के नजदीक ही कॉफी हाउस बना दिया गया है। पाकिस्‍तान में इससे पहले भी कई मंदिर तोड़ दिए गए और इस्‍लामाबाद में एक हिंदू मंदिर के लिए जगह दिए जाने के बाद भी उसे बनने नहीं दिया जा रहा है।

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