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शिक्षकों का सीधा जवाब-हमारा नहीं है यह काम

निरक्षरों के सर्वेक्षण की दी गई है जिम्मेदारी
सामना संवाददाता / मुंबई

`नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत राज्य में निरक्षरों का सर्वेक्षण करने का आदेश शिक्षकों को दिया गया है, जिसका विरोध करते हुए राज्य के शिक्षकों ने इस सर्वेक्षण का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इसके तहत महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने इस बहिष्कार की घोषणा की है।
राज्य शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को स्कूल न जानेवाले छात्रों के साथ-साथ निरक्षरों का भी सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है। उन्हें यह सर्वेक्षण कार्य स्कूल से पहले और स्कूल के बाद करना होगा। इसमें शिक्षकों से निरक्षरता के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की जानकारी जुटाने को कहा गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षकों को दशकीय जनगणना के अलावा कोई भी गैर-शिक्षण कार्य नहीं दिया जाना चाहिए। फिलहाल मतदाता पंजीकरण का काम शिक्षकों को दिया गया है। हालांकि, भले ही निरक्षरता सर्वेक्षण अभियान शैक्षिक प्रतीत होता है, लेकिन इसमें बहुत सारी गैर-शैक्षणिक जानकारी एकत्र करने के लिए कहा गया है।
२०११ की जनगणना की तरह ही १५ से ३५ आयु वर्ग के निरक्षर लोगों का सर्वेक्षण करने के लिए कहा गया है। महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने कहा है कि निरक्षरों की खोज और उसमें निर्माण कार्य श्रमिकों के बारे में जानकारी एकत्र करने का काम शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के साथ पूरी तरह से असंगत है। राजेश सावरकर के मुताबिक, प्राथमिक शिक्षक समिति के पदाधिकारियों ने राज्य शिक्षा निदेशक महेश पालकर से मुलाकात कर बहिष्कार के संबंध में एक निवेदन दिया है। निवेदन देते समय शिक्षा समिति के नेता उदय शिंदे, कोषाध्यक्ष नंद कुमार होलकर के साथ अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
`निर्माण श्रमिकों’ की भी जिम्मेदारी
स्कूल न जानेवाले छात्रों को ढूंढकर उन्हें शैक्षिक धारा में लाने का काम शिक्षक कर ही रहे हैं। हालांकि, निरक्षर सर्वेक्षण और निर्माण श्रमिकों के बारे में जानकारी एकत्र करना शिक्षकों का काम नहीं है। इसलिए महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति इस सर्वेक्षण का बहिष्कार कर रही है। समिति ने यह भी कहा कि प्राथमिक शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए और उन्हें किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जाना चाहिए।

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