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सीटों के बंटवारे पर सीधी टक्कर! … भाजपा और दादा गुट में ‘बावन’ लफड़े

•  शिंदे गुट हाशिए पर
सामना संवाददाता / मुंबई
ईडी सरकार में अजीत पवार गुट शामिल हो गया है। शामिल होने के बाद से ही शिंदे सहित उनके गुट के विधायक अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यानी शिंदे गुट हाशिए पर चला गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सरकार में मंत्रालय के बंटवारे से जुड़ी समस्या को सुलझाना बहुत मुश्किल नहीं था। वह सुलझ भी गई, परंतु अगली समस्या भाजपा के लिए आगामी लोकसभा और विधान सभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर सीधी टक्कर भाजपा और अजीत पवार गुट के बीच है, क्योंकि दोनों गुटों में ‘बावन’ लफड़े हैं। राजनीतिज्ञ विशेषज्ञों के मुताबिक, दादा गुट को लेकर भाजपा में यह परेशानी है कि जिस सीट पर भाजपा और दादा गुट की सीधी टक्कर है वहां भाजपा क्या करेगी?
दरअसल, महायुति में शामिल हुए अजीत पवार गुट के कुछ नेताओं की अपनी-अपनी विधान सभा सीटों पर भाजपा से सीधी टक्कर रही है। सालों साल तक दादा गुट के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले भाजपा विधायकों और पदाधिकारियों के सामने अब असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। महाविकास आघाड़ी सरकार बनने के बाद इन सीटों पर भाजपा पदाधिकारियों ने तीनों दलों के खिलाफ चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन अब उन्हें अजीत पवार और एकनाथ शिंदे के साथ काम करना होगा। भाजपा पदाधिकारियों का सबसे बड़ा संकट यही है।
परली में दोनों में सीधी टक्कर
परली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की पंकजा मुंडे और दादा गुट के मंत्री धनंजय मुंडे के बीच सीधी टक्कर थी। इस सीट को लेकर भाजपा और दादा गुट में बड़ी टक्कर होगी। इसी प्रकार २०१९ के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने अजीत पवार के खिलाफ गोपीचंद पडलकर को उम्मीदवार बनाया था। गोपीचंद पडलकर की जमानत जब्त हो गई थी, लेकिन पडलकर ने अक्सर ही पवार परिवार और अजीत पवार की तीखी आलोचना की है। लेकिन मौजूदा स्थिति में पडलकर को भी अब अजीत पवार के साथ मिलकर काम करना होगा।
किरीट सोमैया ने दादा गुट के नेता और मंत्री हसन मुश्रीफ पर १२७ करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ईडी को कथित तौर पर सबूत भी पेश किए थे। कोल्हापुर में भाजपा और दादा गुट के कार्यकर्ताओं के बीच तनातनी की स्थिति भी देखने को मिली। किरीट सोमैया ने तब कहा था कि मुश्रीफ जेल जाएंगे। लेकिन जब से हसन मुश्रीफ मंत्री बने हैं, तबसे किरीट सोमैया ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, अभी ये नाराजगी अंदरूनी लग रही है, लेकिन चुनाव के दौरान विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

भाजपा में हो सकता है विद्रोह
पिछले चुनाव में भाजपा ने जहां विधान सभा की १६० सीटों पर चुनाव लड़ा था, वहीं इस बार दो पार्टियों से तालमेल बनाते हुए कम सीटों पर समझौता करना होगा। इस वजह से भी भाजपा नए चेहरों को कम मौका दे पाएगी। इससे कार्यकर्ताओं में बड़े पैमाने पर विद्रोह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जाहिर है कि यह वो पहलू है, जो भाजपा नेताओं की विधान सभा क्षेत्रों में मुश्किलें बढ़ा सकता है। भाजपा के हिंदुत्व की विचारधारा का क्या होगा? अजीत पवार के युति में शामिल होने पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि अजीत पवार के साथ युति राजनीतिक है। लेकिन एकनाथ शिंदे गुट के साथ भावनात्मक युति है। भविष्य में अजीत पवार के साथ भी भावनात्मक युति होगी।

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