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यूपी में आफत, हिंसा का शिकार हो रही हैं बेटियां! वाराणसी और जौनपुर में मिला एक-एक शव

  • चंदौली में बदहवास मिली अर्धनग्न युवती

सामना संवाददाता / वाराणसी/जौनपुर/चंदौली
यूपी में योगी सरकार में बेटियां सुरक्षित नहीं रह गई हैं, जहां हिंसा की शिकार आए दिन हो रही हैं। वाराणसी, जौनपुर और चंदौली जिले से महिला अपराध से जुड़ी ऐसी खबर सामने आई जिसने सोचने पर विवश कर दिया। वाराणसी में रिंग रोड के किनारे नाले में औंधे मुंह युवती का शव मिला। हत्या कर शव फेंके जाने की आशंका है। युवती के चेहरे और गले पर चोट के निशान हैं। उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। वहीं चंदौली जिले के कोरडिया गांव के खेत में शनिवार सुबह बदहवास और अर्धनग्न हालत में एक युवती मिली। उसने तिरपाल से शरीर को ढंक रखा था। युवती ने कुछ बोल पा रही है और न ही किसी को पहचान पा रही है। उसकी अभी पहचान नहीं हो पाई है। इधर, जौनपुर के मड़ियाहूं क्षेत्र में एक किशोरी का शव उसके घर से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर रेल पटरी पर मिला। तीनों जिलों में हुई इस घटना से यूपी की जनता भी हैरान है।
रेलवे ट्रैक पर मिला शव
जौनपुर के भुलईपुर गांव निवासी जिलाजीत की पुत्री प्रिया शुक्रवार रात अपने कमरे में सो रही थी। परिवार के लोगों ने बताया कि रात में बिना किसी को बताए घर से निकल गई। परिजनों ने प्रिया को घर में नहीं देखा तो तलाशना शुरू किया। मगर उसका कुछ पता नही चला। शनिवार सुबह कुछ ग्रामीण रेल पटरी की ओर गए तो वहां उसका शव पड़ा था। प्रिया के पिता जिलाजीत ने बताया कि प्रयागराज से जौनपुर की तरफ जाने वाली एजे पैसेंजर रात करीब १० बजे गुजरी। उस समय तक प्रिया का शव ट्रैक पर नहीं था।
चंदौली में अर्धनग्न हालत में मिली युवती
चंदौली के कोरडिया गांव के खेत में शनिवार सुबह बदहवास और अर्धनग्न हालत में एक युवती मिली। उसने तिरपाल से शरीर को ढंक रखा था। युवती के मिलने से गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस युवती को जिला अस्पताल ले गई।
१७ महीने तक शव की सेवा
यूपी के कानपुर में बेइंतहा मोहब्‍बत के मनोरोग में बदलने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां १७ महीने पूरा परिवार शव की सेवा करता रहा। बैंक मैनेजर पत्‍नी पैर छूकर रोज ड्यूटी पर जाती रही। जानकारी के अनुसार अप्रैल २०२१ में दम तोड़ चुके विमलेश की बैंक मैनेजर पत्नी मिताली दीक्षित के साथ पूरा घर सेवा करता था तखत पर पड़े शव को रोज गंगाजल मिले पानी से पोंछती थी। कपड़े बदलती थी। बच्चे शव से लिपट कर भगवान से प्रार्थना करते थे कि उनके पापा को अच्छा कर दें। १७ महीने से विमलेश के परिवार को विश्वास था कि विमलेश जिंदा है। कोऑपरेटिव बैंक की मैनेजर मिताली रोज बैंक जाने से पहले शव का माथा छूकर जाती थी। उसके सिर पर हाथ फेरती थी और उसे बोलकर जाती थी कि जल्दी ही ऑफिस से लौटकर मिलती हूं।

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