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दूरियां, नजदीकियां बन गईं…शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव आए करीब

• २०२४ में पूरी ताकत से भाजपा का सामना करेगी सपा

सामना संवाददाता / लखनऊ
‘हम साथ-साथ हैं, पूरा परिवार साथ है।’ मुलायम सिंह यादव नहीं रहे, लेकिन उनका परिवार अब यही संदेश दे रहा है। पहले चाचा शिवपाल यादव ने भतीजे अखिलेश यादव से मिलकर सारे गिले-शिकवे खत्म किए। फिर अब भाई-भाई का भी मिलन हो गया है। रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव के रिश्तों की कड़वाहट भी दूर हो गई है। अब तो सब एक सुर में हैं। चाचा शिवपाल यादव के टांग फंसाने के कारण भतीजे अक्षय यादव को हार का घूंट पीना पड़ा था, वहीं चाचा अब अपने भतीजे की चुनाव में जीत का फॉर्मूला बना रहे हैं। शिवपाल यादव ने तो फिरोजाबाद में समाजवादी पार्टी के ट्रेनिंग वैंâप में अक्षय की जीत का एलान भी कर दिया है। अगले लोकसभा चुनाव को लेकर अब ये संदेश है कि परिवार एक है और भाजपा का सफाया तय है।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जीते-जी अपने परिवार को एक नहीं कर पाए। उनकी तमाम कोशिशें बेकार रहीं, लेकिन उनके निधन के बाद तो पूरी कहानी बदल गई। मैनपुरी लोकसभा के उपचुनाव ने परिवार को एक होने के लिए मजबूर कर दिया। आजमगढ़ के लोकसभा उपचुनाव में परिवार के ही सदस्य धर्मेंद्र यादव चुनाव हार चुके थे, जबकि आजमगढ़ सीट समाजवादी पार्टी के लिए सेफ सीट मानी जाती थी। मुलायम और अखिलेश यादव दोनों ही यहां से चुनाव जीत चुके थे। मैनपुरी से परिवार की बहू और अखिलेश की पत्नी डिंपल चुनाव लड़ रही थीं। फिर भाजपा कोई खेल न कर दे, इस डर ने परिवार को एकजुट कर दिया। एकता की पहल खुद डिंपल यादव ने की और फिर चाचा शिवपाल यादव ने उन्हें विजयी भव का आशीर्वाद दे दिया। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान शिवपाल के बेटे आदित्य उनके साथ रहे। डिंपल ने भाजपा को दो लाख से भी अधिक वोटों से हरा दिया। इसी जीत के साथ परिवार में एकता की नींव पड़ी, जो अब दिन ब दिन मजबूत होती जा रही है।
इसी महीने यूपी विधानसभा में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवपाल यादव को अपने भतीजे अखिलेश यादव से सतर्क रहने की हिदायत दी। योगी ने कहा था, चाचू अभी से रास्ता तय कर लो अपना। जब भी आपका नंबर आता है आपको काट दिया जाता है। जवाब में शिवपाल ने कहा हम तो तीन साल से आपके संपर्क में रहे, जब जागो तभी सवेरा। तो समाजवादी परिवार में सवेरा हो चुका है।

संगठन को मजबूत करने में जुटे शिवपाल
अखिलेश यादव इन दिनों सार्वजनिक मंचों से अपने चाचा की तारीफ करते नहीं थकते, वहीं चाचा शिवपाल भी अखिलेश का ढाल बनकर संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। उनके गुट के कई नेताओं के हाल में गठित पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। २०१७ के विधानसभा चुनाव के दौरान मुलायम परिवार में मचे घमासान की सबसे बड़ी वजह रामगोपाल यादव बने थे। खुद मुलायम सिंह ने कहा था सारा झगड़ा प्रोफेसर करवाते हैं। समाजवादी पार्टी में रामगोपाल यादव को प्रोफेसर कहा जाता है। परिवार में झगड़े के बाद शिवपाल ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना ली थी। रामगोपाल और शिवपाल के आपसी झगड़े जगजाहिर थे।

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