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डॉक्टर सीख रहे हैं अंग प्रत्यारोपण के गुर! केईएम के कैडेवर ट्रेनिंग लैब में प्रशिक्षण

  • अन्य राज्यों से ट्रेनिंग के लिए आ रही डॉक्टरों की टीम

सामना संवाददाता / मुंबई
अंगदान की धीमी प्रक्रिया को तेज बनाने और लगनेवाले समय को कम करने के लिए मनपा के केईएम अस्पताल में डॉक्टरों को ब्रेन डेड मरीजों के विभिन्न अंगों को निकालने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अस्पताल में हाल ही में शुरू हुई कैडेवर ट्रेनिंग लैब में प्रशिक्षण के साथ-साथ डॉक्टरों का मार्गदर्शन भी किया जा रहा है। दूसरी तरफ लैब में मुंबई से ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी डॉक्टर ट्रेनिंग के लिए पहुंच रहे रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अब तक डॉक्टरों के चार बैचों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। चारों बैच में शामिल दो सौ से अधिक डॉक्टरों ने शरीर से अंग निकालने की कला में महारत हासिल कर ली है। कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से मुंबई में अंगदान करनेवालों की संख्या में कमी आई थी। हालांकि इस साल अंगदान ने कुछ हद तक रफ्तार पकड़ी है। इतना ही नहीं रीजनल कम स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (रोटो-सोटो) पश्चिम विभाग ने अंगदान के लिए जरूरी समय को कम करने के लिए कदम उठाए हैं। इसके तहत अप्रैल में मुंबई के केईएम अस्पताल में राज्य में पहली कैडेवर ट्रेनिंग लैब शुरू की गई।
१० से १५ बड़े अस्पतालों में शुरू है अंगदान
रोटो-सोटो पश्चिम विभाग की निदेशक डॉ. सुजाता पटवर्धन के मुताबिक फिलहाल १० से १२ बड़े अस्पतालों में अंगदान और प्रत्यारोपण किया जा रहा है। सभी डॉक्टर नहीं जानते कि प्रत्यारोपण के लिए शरीर से किसी अंग को कैसे निकालना है? इसलिए रोटो-सोटो द्वारा इस तरह के ट्रेनिंग लैब को शुरू किया गया है। इसे अलग-अलग राज्यों के डॉक्टरों का अच्छा प्रतिसाद भी मिल रहा है। लैब में अब तक चार बैचों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। बताया गया कि प्रत्येक बैच में ५० से ६० डॉक्टरों की टीम होती है।
बाहरी राज्यों से अंग लाने में लगता है समय
बताया गया है कि अनुभवी डॉक्टरों की कमी के चलते बाहरी राज्यों से अंग लाने में समय लगता है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट की आवश्यकतावाले अस्पतालों में अनुभवी डॉक्टर अंग निकालने के लिए पहुंचते तो हैं लेकिन वे अपनी इच्छा के अनुसार अंगों को निकालते हैं, इसलिए इसमें देरी होती है। ऐसे में प्रशिक्षण से अनुभवी डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं हर अस्पताल में अंग निकालने के लिए डॉक्टर आसानी से उपलब्ध होंगे।

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