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चिकित्सकों को नहीं भा रही जेनेरिक दवाइयां, लिखने की सख्ती! बोले कौन-सी दवाएं लिखनी हैं, इस पर नहीं हो कोई प्रतिबंध, डॉक्टर्स एसोसिएशन जता रही है भारी विरोध

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
हिंदुस्थान के चिकित्सकों के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने नए नियमों को जारी करते हुए सख्ती से लागू किए जाने का आदेश दिया है। हालांकि, यह सख्ती चिकित्सकों को नहीं भा रही है और उन्होंने नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि हमें कौन-सी दवाएं लिखनी हैं, इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। बता दें कि नए नियमों के तहत अब चिकित्सकों को हर हाल में जेनेरिक दवाएं ही लिखने के निर्देशों के साथ ही चेतावनी दी गई है, जिसमें कोताही बरतने पर संबंधित चिकित्सकों के प्रैक्टिस लाइसेंस सस्पेंड कर देने की बात कही गई है। इतना ही नहीं, नए नियमों में अन्य दंड के प्रावधान भी किए गए हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने यह निर्णय मरीजों के हित में लिया है।
उल्लेखनीय है कि दो अगस्त को जारी किए गए एनएमसी नियमों के अनुसार, चिकित्सकों को जेनेरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। साथ ही चिकित्सकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे यदि किसी मरीज को दवाएं लिख रहे हैं तो उसे स्पष्ट भाषा में लिखें, ताकि हर कोई भी पढ़ सके। इसके साथ ही दवाओं के नाम अंग्रेजी के वैâपिटल लेटर्स में लिखे जाने चाहिए। अगर हैंडराइटिंग सही नहीं है तो पर्ची को टाइप कराकर मरीज को प्रिस्क्रिप्शन दिया जाए। चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें जेनेरिक दवाएं लिखने में कोई शिकायत नहीं है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने के साथ-साथ गैर-जेनेरिक दवाओं की पर्ची पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी पर आपत्ति है। डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी इस पैâसले का विरोध किया है। हिंदुस्थान में स्वास्थ्य देखभाल पर कुल व्यय का एक बड़ा हिस्सा फार्मास्यूटिकल्स पर खर्च होता है। जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में ३० से ४० प्रतिशत सस्ती होती हैं। यही वजह है कि आयोग ने यह कहकर पैâसले का समर्थन किया है कि अगर डॉक्टर जेनेरिक दवाएं लिखें तो स्वास्थ्य देखभाल की लागत कम हो सकती है।

अनिवार्यता है गलत
सभी को सीधे जेनेरिक दवाएं लिखना कितना उचित है। साथ ही जेनेरिक दवाएं न लिखने पर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, यह कहना भी सही नहीं है। डॉक्टर को पता होता है कि मरीज को किस समय कौन-सी दवाएं देनी हैं। जेनेरिक दवाएं ही लिखें, यह ठीक है लेकिन अनिवार्यता गलत है।
-डॉ. संतोष कदम, महासचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

डॉक्टरों के अधिकारों पर कुठाराघात
चिकित्सकों का कहना है कि जेनेरिक दवाएं निर्धारित की जानी चाहिए, लेकिन इसी को प्रिस्क्राइब करो, यह सख्ती ठीक नहीं है। मरीज को पैâसला करने दें। यदि वे ब्रांडेड दवाइयों के खर्च को वहन नहीं कर सकते तो वे खुद ही जेनेरिक दवाएं लेगें। यदि कुछ मरीज जेनेरिक दवाएं नहीं चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में हम क्या करेंगे? यह पैâसला डॉक्टरों के अधिकारों पर कुठाराघात है।

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