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डोंबिवली बॉयलर ब्लास्ट: खोके वाली सरकार जिम्मेदार! …उद्योगपतियों से सांठगांठ कर केमिकल्स कंपनियों को दी अनुमति 

महाविकास आघाड़ी सरकार ने बॉयलर कंपनियों को हटाने का दिया था निर्देश
१३ लोगों की अबतक मौत की हुई पुष्टि
२०१६ में प्रॉब्स कंपनी में हुए विस्फोट की यादें हुईं ताजा
२०१९ में प्रॉक्सी कंपनी में भी हुआ था विस्फोट

नागमणि पांडेय / मुंबई
डोंबिवली एमआईडीसी फेज दो की केमिकल कंपनी में बॉयलर फटने की घटना में अब तक १३ लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। इस मौत के लिए खोके वाली सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में डोंबिवली एमआईडीसी का केमिकल कंपनियों को अंबरनाथ शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन आरोप है कि राज्य में खोके वाली सरकार आने के बाद वहां के उद्योगपतियों से सांठगांठ करके उद्योग जारी रखे गए, जिसके कारण आज बेकसूर कामगारों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने भी खोके वाली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
बता दें कि डोंबिवली एमआईडीसी रहिवासी क्षेत्र से लगा हुआ है। इस एमआईडीसी में कई केमिकल कंपनियां होने के कारण हमेशा आग लगने और विस्फोट का डर बना रहता है। इस बीच गुरुवार को अबुदान केमिकल कंपनी के बॉयलर विस्फोट ने एक बार फिर २७ मई २०१६ को प्रॉब्स कंपनी में हुए विस्फोट की यादें ताजा कर दीं। उस समय विस्फोट में १२ लोगों की मौत हो गई थी और १२५ से अधिक लोग घायल हुए थे। यह विस्फोट इतना भीषण था कि उसका असर पांच किलोमीटर तक देखने को मिला, जबकि कंपनी पूरी तरह से जमींदोज हो गई थी। इसी तरह वर्ष २०१९ में प्रॉक्सी कंपनी में विस्फोट होने से कंपनी के सुपरवाइजर और कर्मचारी ५० प्रतिशत से अधिक जल गए थे। इसके बाद १८ फरवरी २०२० को मेट्रोपॉलिटन कंपनी में भीषण आग लग गई थी। लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं को देखकर तत्कालीन सरकार ने इन्हें अंबरनाथ स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था, जिसे खोके सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। आज भी स्थानीय नागरिकों में काफी डर बना हुआ है।
इसके लिए यहां की केमिकल कंपनियों को हटाने की मांग हो रही है। नागरिकों की शिकायतों को देख महाविकास आघाड़ी सरकार में डोंबिवली एमआईडीसी की केमिकल कंपनियों को यहां से बंद कर रहिवासी क्षेत्र से दूर ले जाने का आदेश दिया था, लेकिन जुलाई २०२२ में खोके वाली सरकार आते ही डोंबिवली एमआईडीसी की केमिकल कंपनियों के मालिकों से पैसे लेकर शुरू रहने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है, जिसके कारण आज यहां के नागरिक जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।

 

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