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ट्रंप वॉल से डाइव करके मर गया ‘डंकी’! …गुजरात विकास की अमेरिका में खुली पोल!

यूएस में अवैध घुसपैठ करने वालों में गुजराती सबसे आगे

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भाजपा हमेशा गुजरात को देश का सबसे विकसित राज्य बताने से नहीं चूकती। वो अक्सर गुजरात मॉडल का गुणगान करती रहती है, पर इस गुजरात विकास की पोल अक्सर खुलती रहती है। हाल ही में फ्रांस से एक चार्टर विमान से २७६ ‘डंकी’ मुंबई लाए गए थे। इनमें से २१ गुजराती निकले। अब अमेरिका में घटी एक घटना गुजरात की पोल खोलने के लिए काफी है। वहां गत वर्ष मैक्सिको और अमेरिका के बॉर्डर पर बने ३० फुट ऊंचे ट्रंप वॉल से डाइव करके गुजरात का बृजकुमार नामक एक ‘डंकी’ मर गया था। यह ‘डंकी’ गांधीनगर के समीप के गांव का रहनेवाला था। घटना के वक्त उसकी पत्नी व बच्चा भी साथ थे और दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ये लोग ‘ट्रंप’ वॉल फांदकर अवैध रूप से अमेरिका में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे।
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका में अवैध घुसपैठ करनेवालों में गुजराती लोग सबसे आगे हैं। पूर्व में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पहले उत्तरी गुजरात के डिंगुचा गांव के जगदीश, वैशालीबेन पटेल और उनके दो बच्चों की मौत अमेरिका-कनाडा सीमा पर ठंड से जमने के कारण हो गई थी। ये परिवार जिस रात पैदल कनाडा से अमेरिका जाने की कोशिश कर रहा था, उस रात तापमान माइनस ३५ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। ठीक एक साल पहले गांधीनगर जिले के बोरीसणा गांव में कलोल के रहने वाले बृजकुमार यादव की मेक्सिको-अमेरिका सीमा पर बनी दीवार से गिरकर मौत हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस वक्त बृजकुमार ‘ट्रंप वॉल’ पर चढ़ रहे थे, उस वक्त उनकी गोद में उनका तीन साल का बच्चा भी था। बोरीसणा गांव में रहने वाले अधिकांश लोग पटेल और ठाकोर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से अधिकांश लोगों को गांव के आस-पास मौजूद कारखानों में रोजगार मिल जाता है और फिर यहां खेती भी अच्छी होती है। इस गांव की आबादी लगभग ३,००० है और इनमें युवाओं की संख्या बहुत कम है, क्योंकि यहां के अधिकांश युवा काम की तलाश में या तो विदेश गए हैं या फिर उन्होंने आस-पास के शहरों का रुख किया है। बृजकुमार की उम्र ३२ थी। बृजकुमार के पिता स्थानीय टेलीफोन विभाग में काम करते थे। वो सात साल पहले रिटायर हो चुके थे। बृजकुमार खुद बोरिसणा में छोटा-मोटा कारोबार किया करते थे। बृजकुमार के एक दोस्त के अनुसार, ‘बृजकुमार जल्दी से बहुत पैसा कमाना चाहता था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह अवैध तरीके से विदेश चला गया है।’ बृजकुमार के भाई विनोद ने इस घटना के बारे में कहा कि उनके भाई ने उन्हें कहा था कि वो एक महीने के लिए घूमने जा रहे हैं। इसके बाद बृजकुमार की पत्नी पूजा ने उन्हें कई बार फोन किया। पूजा उन्हें बताती रहती थी कि वे लोग ठीकठाक हैं, लेकिन हमें नहीं पता था कि वे कहां हैं। लेकिन एक दिन हमें फोन आया कि ब्रेन हेमरेज होने से मेरे भाई बृजकुमार की मौत हो गई है। उसके बाद उनके साथ हमारा कोई संपर्क नहीं हुआ। हम चाहते हैं कि सरकार हमारी मदद करे और मेरे भाई का शव और उनके परिवार को हिंदुस्थान लाया जाए।

डेढ़ करोड़ में बने ‘डंकी’
हाल ही में फ्रांस से एक चार्टर विमान में २७६ ‘डंकी’ को मुंबई भेजा गया था। इनमें २१ गुजराती भी शामिल थे। गुजरात वापस भेजे गए कुछ लोगों ने पुलिस को बताया है कि उनमें से कुछ ने ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका पहुंचने के लिए १.५ करोड़ रुपए तक खर्च किए थे। इस मामले में गुजरात पुलिस बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले की जांच भी कर रही है। इन लोगों ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पासपोर्ट और वीजा हासिल करने के लिए किया है। पुलिस ने प्रâांस से वापस गुजरात लौटे २१ लोगों की गहनता से जांच की है।

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