भ्रम न करो

रे मन अब तो भ्रम न करो।
लुट गयी जिंदगी आंख न सूझे,
अब तो शर्म करो ।।
सत्य छोड़ संसार में फंस गए,
नख-शिख कपट भरो ।
खोई उमर अकारथ बंदे,
कबहूं न भजन करो ।।
निद्रा में सब रात गंवाई,
दिवस न चैन पड़ो ।
अब भी संभल मूढ़ मन मेरो,
हरि का ध्यान धरो।।
लखचौरासी जाइ पडे़ जब,
इत-उत बिकल फिरो।
तब नहिं ज्ञान मिलेगा मूरख,
अब हीं से चेत करो ।।
ज्ञान पाइ निज अनुभव करलो,
यह तन सफल करो।
कहें ‘प्रेम’ तू सुन ले भाई,
जा प्रभु शरण परो ।।
-प्रेम रावत

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