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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी फिक्र नहीं … भाजपा सत्ता में आई तो वापस आएगा चुनावी बॉन्ड! … निर्मला सीतारमण का बेतुका बयान

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश में चुनावी बॉन्ड घोटाले पर बवाल मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट इसे असंवैधानिक घोषित कर चुका है। ऐसे में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बेशर्मी से कहा है कि अगर उनकी पार्टी फिर से सत्ता में आती है तो वे चुनावी बॉन्ड को फिर से वापस लाएंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यदि भाजपा २०२४ के आम चुनावों में फिर से सत्ता में वापसी करती है, तो सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद चुनावी बॉन्ड योजना को किसी न किसी रूप में वापस लाया जाएगा। ‘एचटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्मला सीतारमण ने इस विवादास्पद राजनीतिक फंडिंग योजना में अपना विश्वास जताया, जिसे फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस योजना में कुछ बदलाव जरूरी थे। खबर के मुताबिक, साक्षात्कार में सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति २०२४ के चुनावों के लिए बहुत उपयुक्त है, उन्होंने महंगाई को नियंत्रण में रखने का श्रेय लिया, भ्रष्टाचार और उत्तर-दक्षिण विभाजन को बढ़ावा देने के लिए विपक्ष पर हमला बोला और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए एक सुझाव भी पेश किया। उन्होंने कहा, ‘हमें अभी भी हितधारकों के साथ बहुत विचार-विमर्श करना है और देखना है कि ऐसा ढांचा बनाने या लाने के लिए हमें क्या करना है जो सभी के लिए स्वीकार्य होगा, मुख्य रूप से ऐसा ढांचा जो पारदर्शिता के स्तर को बनाए रखने वाला और इसमें काले धन के प्रवेश की संभावना को पूरी तरह से खत्म करने वाला हो। उन्होंने साथ ही कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पैâसले की समीक्षा की मांग की जाए या नहीं। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्तमंत्री सीतारमण के पति परकाला प्रभाकर चुनावी बॉन्ड को दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला बता चुके हैं। बता दें कि गत १५ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक फंडिंग के लिए चुनावी बॉन्ड स्कीम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, यह स्कीम असंवैधानिक है। बॉन्ड की गोपनीयता बनाए रखना असंवैधानिक है। यह स्कीम सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- हम जानते हैं कि भाजपा ने पेपीएम के घोटाले से ४ लाख करोड़ की लूट की। अब वे लूट जारी रखना चाहते हैं। जरा इन तरीकों पर ध्यान दें। पेपीएम : १- चंदा दो, धंधा लो। २. पोस्टपेड घूस- ठेका दो, रिश्वत लो। प्री-पेड और पोस्टपेड के लिए घूस- ३.८ लाख करोड़। ३. पोस्ट-रेड घूस-हफ्ता वसूली। पोस्ट-रेड घूस की कीमत-१८५३ रुपए। ४. फर्जी कंपनियां-मनी लॉन्ड्रिंग। फर्जी कंपनियों की कीमत- ४१९ करोड़। अगर वे जीते और इलेक्टोरल बॉन्ड फिर से लेकर आए तो इस बार कितना लूटेंगे? कपिल सिब्बल ने कहा- मैं निर्मला सीतारमण का सम्मान करता हूं। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि इसमें पारदर्शिता नहीं थी। वे (सरकार) इसे नॉन-ट्रांसपेरेंट तरीके से लेकर आए। अब समस्या यह है कि उनके पास इस चुनाव के लिए तो पैसा है, लेकिन वे ये भी जानते हैं कि अगर हार गए तो भी पैसे की जरूरत होगी। मैं मोहन भागवत से पूछना चाहता हूं कि वे इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं?

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