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न भूलो ठाकरे परिवार का एहसान! दरे गांव के लोगों की शिंदे को सलाह

सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना से बगावत करके राज्य के मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे को दरे गांव के लोगों ने सलाह दी है। ग्रामीणों ने शिंदे के मुख्यमंत्री बनने की खुशी तो जाहिर की है लेकिन उन्हें सुझाव दिया है कि वे ठाकरे परिवार के एहसानों को न भूलें क्योंकि उन्हीं की बदौलत वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद सातारा जिले में स्थित शिंदे का मूल गांव दरे इन दिनों सुर्खियों में है। सह्याद्रि की पहाड़ियों में और कोयना नदी के तट पर दरे गांव बसा हुआ है। इस गांव में शिंदे जाति के २७ परिवार रहते हैं। उनमें से एक घर एकनाथ शिंदे का भी है। एकनाथ शिंदे के पिता संभाजी शिंदे रोजी-रोटी की तलाश में ठाणे आए। उस समय उनके बेटे एकनाथ शिंदे स्कूल में पढ़ते थे। शिंदे परिवार ने दरे गांव से नाता नहीं तोड़ा। पिता संभाजी शिंदे की उंगलियां पकड़कर ठाणे में पले-बढ़े एकनाथ शिंदे ने ठाकरे परिवार की बदौलत राजनीति में अपना मुकाम बनाया।
दरे और आस-पास के ग्रामवासियों का कहना है, `हमें गर्व है कि ग्रामीण क्षेत्र से एक व्यक्ति शहर जाता है और शाखाप्रमुख के पद से मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचता है। हमें विश्वास कि शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के बाद हमारे गांव और क्षेत्र का विकास होगा। लेकिन उन्हें ठाकरे परिवार से संपर्क करना चाहिए। उन्हीं की बदौलत शिंदे यहां तक ​​पहुंचे हैं। उन्हें ठाकरे परिवार का ख्याल रखना चाहिए। शिंदे को ठाकरे परिवार के एहसानों को नहीं भूलना चाहिए।’

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