मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाचुनाव का पता नहीं पोस्टरों की भरमार

चुनाव का पता नहीं पोस्टरों की भरमार

योगेश कुमार सोनी। बीते दिनों दिल्ली में नगर निगम चुनाव होनेवाले थे, जिसकी बड़े स्तर पर तैयारी चल रही थी लेकिन चुनाव आयोग ने यह कहकर चुनाव स्थगित कर दिए कि तीनों निगमों को एक किया जा रहा है। इस मामले पर केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर चुनाव स्थगित करवा दिए। इस घटनाक्रम को लेकर दिल्ली में माहौल गर्म है। इस प्रकरण की सबसे बड़ी बात यह है कि जिन प्रत्याशियों को जिस पार्टी ने टिकट देने की घोषणा या बात कही थी उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र को पोस्टरों से रंगवा दिया। तमाम प्रत्याशी ऐसे थे, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद टिकट लेने की स्थिति बनाई थी। यदि इस समय दिल्ली की दीवारों व खंभों को देखा जाए तो वो पूरी तरह चुनावी रंग में रंगे हुए नजर आ रहे हैं। प्रचार के रूप में लाखों-करोड़ों रुपए व्यर्थ हो गए, जिसको लेकर क्षेत्रवासी प्रत्याशियों पर तंज मारते व हंसते हैं। लेकिन इस मामले को गंभीरता से देखा जाए तो यह सरकार की पूर्ण रूप से विफलता है चूंकि यदि ऐसा करना था तो इसकी रणनीति पहले से ही बनानी चाहिए थी। इस मामले पर चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़ा हो जाता है। हमारे देश में पहले से ही देश की सबसे बड़ी एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई पर सरकार का तोता होने का आरोप लग चुका है। हम ऐसे दंशों को कई बार झेलते आए हैं। सरकारों के वर्चस्व व चुनावी लड़ाई एक तरफ लेकिन लोकतंत्र को अपने तरीके संचालित करना लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है जो हाल ही व आनेवाली पीढ़ी के लिए बेहद चिंताजनक है। केजरीवाल सरकार ने सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले ८ साल से केंद्र में बीजेपी की सरकार है और यदि केंद्र सरकार को तीनों एमसीडी का एकीकरण करना था तो अभी तक क्यों नहीं किया? चुनाव की तारीख घोषित करने से एक घंटे पहले अचानक अब तीनों एमसीडी को एक करने की बात क्यों कही, स्पष्ट है कि चुनाव टाल दिए जाएं। तीनों एमसीडी को एक करना तो एक बहाना है, असली मकसद तो चुनाव टालना है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि हमारी लहर को देखते हुए बीजेपी को अपनी हार का डर सता रहा था और इसके चलते चुनाव टाल दिए गए। बहरहाल, हमारे देश की राजनीति में बड़े-बड़े खेल चलते हैं, किसी ने पार्टी की सेवा करके टिकट लिया होगा तो किसी ने मेवा देकर लेकिन जिन्होंने पैसे के बल पर लिया है वो अब बहुत छटपटा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों ने अपना बहुत कुछ दांव पर लगाकर टिकट लेने की स्थिति बनाई थी और जैसे चुनाव आयोग ने चुनाव को स्थगित करने की घोषणा की वैसे ही उनके चेहरे की रंगत उड़ गई। इस वजह से कुछ लोग तो डिप्रेशन में भी चले गए। हालात ये हैं कि कहीं किनारा तक नहीं मिल रहा है।

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