मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाचुनाव आयोग से विश्वास न उठ जाए?

चुनाव आयोग से विश्वास न उठ जाए?

योगेश कुमार सोनी। मोदी सरकार में भारत की तस्वीर बदलने की हुंकार जितनी जोरो-शोरों पर सुनाई दी थी, वह उतनी ही जल्दी हल्की पड़ती नजर आई। लगातार चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े होना, यह भविष्य की राजनीति के लिए एक बड़ा और बेकाबू होने वाला खतरा बन सकता है। सरकार चाहे किसी की भी हो, हर किसी को अपनी ताकत का दुरुप्रयोग करने की चाह हमें कमजोर बनाती है। सरकारों के पास सिस्टम की पारदर्शिता के नाम पर सिर्फ बातें हैं लेकिन उसको साबित करने के लिए कुछ नहीं। चूंकि तंत्र में घुसने और सच जानने की अनुमति किसी को नहीं दी जाती। दरअसल सरकारों को यह लगता है कि विशेषज्ञ व जनता खेल को समझ नहीं पा रही लेकिन यह मात्र उनकी भूल है चूंकि अब हर कोई गुणात्मक प्रणाली के आधार पर बातों को समझता है। सरकार कुछ भी करे या कहे उसको सामने वाला क्यों माने, यह बात सरकार को समझने में कहां समस्या आ रही है? एक आम हिंदुस्थानी आज भी इस तर्ज पर अपने आप को सुरक्षित समझता है कि उसे कहीं इंसाफ नहीं मिलेगा तो कोर्ट से मिलेगा और लगभग मिलता भी है लेकिन कुछ लोग इस मिसाल को आर्थिक व शक्ति प्रकरण से भेदना चाहते हैं। कहते हैं कि राजनीति की कोई जाति व रंग नहीं होती, जहां जिस पार्टी व नेता को फायदा नजर आता है वो वहां वैसा ही चोला ओढ़कर अपनी रोटी सेंकने लगता है। इस बात को इस कहावत के आधार पर समझिए ‘जहां देखी तवा परात वहीं बिताई सारी रात’। लेकिन अब इन चीजों को बदलना होगा, चूंकि कहानी दुनिया के सबसे बड़े देश की है। हमारे यहां की प्रतिभाओं को दुनिया ने जाना है। जिस रफ्तार से हम परिवर्तन की ओर बढ़ रहे हैं वह सरकारों के कुछ कृत्य से बात बिगड़ न जाए। यदि सभी पार्टियों ने ऐसा करना सीख लिया तो लोकतंत्र की धज्जियां उड़ जाएंगी। अब राजनीतिक पार्टियां समन्वय व संधि के आधार पर नहीं चलतीं। अपने आपको सबसे सर्वश्रेष्ठ बनाने व दिखाने के लिए कोई किसी भी हद तक जाता है। हम बीते समय से ईवीएम में गड़बड़ी की बात सुनते आ रहे हैं। हालांकि प्रमाणिकता के नाम पर कुछ भी हत्थे नहीं लगा लेकिन यहां एक बात यह समझने की है कि जो देश युवाओं का है कहीं वह लोकतंत्र के प्रति बागी न हो जाए और यदि युवा ऐसी चीजों को देखते हुए चुनावों में रुचि लेना बंद कर दिया तो स्थिति अच्छी नहीं होगी। हिंदुस्थान सबसे अधिक युवा वर्ग का देश है। वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, इस समय दुनिया की कुल जनसंख्या सात अरब ८७ करोड़ है। इस आबादी में युवाओं की जनसंख्या करीब सोलह प्रतिशत है। दुनिया के ५७ फीसदी युवा मात्र दस देशों में रहते हैं और इन सभी में भारत प्रथम स्थान पर आता है। हमारा देश युवा शक्ति के मामले में दुनिया का सबसे लीड करने वाला देश है और कुल आबादी का १८ फीसदी युवा हैं। बीते वर्षों में युवाओं के मामले में हमने चीन को भी पछाड़ दिया, जिसका हम बेहतर तरीके से फायदा उठा सकते हैं। बनते-बिगड़ते हाल की तस्वीर के सबसे बड़ा गवाह भारत है। लगातार राजनीति में ऐसी बातों का होना कुशलता को व्यर्थ करता है। इसलिए देश को संचालित करने वालों को यह बात समझनी होगी कि तंत्र प्रणाली के साथ छेड़छाड़ न करें चूंकि खेल बिगड़ गया तो संभाले नहीं संभलेगा, चूंकि सरकारें तो बदलती रहेंगी लेकिन नियम-कानून व लोकतंत्र वही रहता है।

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