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शिवसेना के चिह्न पर तत्काल मत लो निर्णय! सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश

  • मामला संवैधानिक पीठ को सौंपा जाएगा क्या? सोमवार को निर्णय
  • सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शिवसेना के चिह्न को लेकर तुरंत कोई भी फैसला न लें, ऐसा महत्वपूर्ण निर्देश कल सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिया। यह मामला संविधान पीठ को सौंपा जाए या नहीं, इस पर फैसला  सोमवार को होगा। इस बीच शिवसेना के व्हिप का उल्लंघन करनेवाले शिंदे गुट को फटकार लगाते हुए, फिर पार्टी के व्हिप का क्या तात्पर्य रह जाता है, ऐसा सीधा सवाल सुप्रीम कोर्ट ने किया। राजनीतिक दल को पूरी तरह से अनदेखा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह लोकतंत्र के लिए घातक है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को भी संज्ञान में लिया। शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता, विधानसभा अध्यक्ष की वैधता को चुनौती, मुख्य प्रतोद, चुनाव आयोग द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए ८ अगस्त तक दी गई अवधि को शिवसेना की चुनौती समेत ६ याचिकाओं पर कल लगातार दूसरे दिन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन्ना के नेतृत्व में न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की त्रिसदस्यीय खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। शिवसेना की तरफ से वरिष्ठ कानूनविद् कपिल सिब्बल ने जोरदार दलील दी। शिंदे गुट की तरफ से वरिष्ठ कानूनविद् हरीश साल्वे और चुनाव आयोग की तरफ से एड. अरविंद दातार ने पक्ष रखा।
मुख्य न्यायाधीश ने लगाई फटकार
दल-बदल कानून असंतोष विरोधी कानून नहीं हो सकता। किसी पार्टी के विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया तो उसे अयोग्य कैसे ठहराया जा सकता है? ऐसा सवाल शिंदे गुट के वकील हरीश साल्वे के करते ही मुख्य न्यायाधीश रमन्ना ने उन्हें फटकार लगाई। ‘आपका कहना माना तो पार्टी के व्हिप का क्या तात्पर्य निकलेगा? आप राजनीतिक दल की तरफ पूरी तरह अनदेखी नहीं कर सकते। इस तरह अनदेखी करना लोकतंत्र के लिए घातक है’, ऐसा न्यायाधीश ने स्पष्ट किया।
-सभी के लिखित दलीलों की समीक्षा लेकर यह संपूर्ण मामला पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ को सौंपा जाए क्या, इस संदर्भ में फैसला सोमवार को लिया जाएगा, ऐसा मुख्य न्यायाधीश ने कहा।
-शिवसेना का चिह्न धनुष-बाण हमारे गुट को दिया जाए, ऐसी मांग शिंदे गुट ने चुनाव आयोग से की है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने पार्टी चुनाव चिह्न को लेकर आयोग को तत्काल कोई भी फैसला न लेने का आदेश दिया।
-चुनाव आयोग ने शिवसेना और शिंदे गुट को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए ८ अगस्त की अवधि दी थी। इसे शिवसेना ने चुनौती दी है। इस पर कल न्यायालय ने दस्तावेज पेश करने के लिए अवधि बढ़ानी हो तो आयोग बढ़ाए लेकिन तत्काल कोई भी फैसला  न लें, ऐसा कहा।
आयोग की दलीलें
चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ कानूनविद अरविंद दातार ने दलील देते हुए कहा कि हम स्वायत्त संस्था हैं।
विधान मंडल के घटनाक्रमों का राजनीतिक पार्टी की सदस्यता से कोई संबंध नहीं है।
संविधान में अनुच्छेद- १० और चुनाव आयोग का कार्यक्षेत्र अलग है। बागी यदि अयोग्य हुए तो उनकी विधायकी जाएगी। राजनीतिक पार्टी की सदस्यता से संबंध नहीं है।
कपिल सिब्बल का तर्क 
हमारे लिए बागी विधायक अयोग्य हैं। इसलिए अयोग्य साबित हुए लोग चुनाव आयोग के पास नहीं जा सकते।
शिंदे गुट की तरफ से राजनीतिक दल और विधानमंडल पक्ष के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है।
४० विधायकों का समर्थन होने की बात शिंदे गुट कर रहा है। ये ४० विधायक अयोग्य साबित हुए तो हम ही मूल पार्टी हैं, उनके इस दावे का क्या तात्पर्य है? इसका क्या आधार है?
यह मामला संवैधानिक पीठ को सौंपने की आवश्यकता नहीं है।

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