मुख्यपृष्ठनए समाचारडबल इंजन हुआ बेकार, मणिपुर में अब आई ‘आदिवासी’ सरकार!

डबल इंजन हुआ बेकार, मणिपुर में अब आई ‘आदिवासी’ सरकार!

आदिवासी संगठन ने की कई जिलों में ‘स्वशासन’ की घोषणा

मणिपुर पिछले सात-आठ महीनों से हिंसा की आग में सुलग रहा है। डबल इंजिन की राज्य व केंद्र की भाजपा सरकार हिंसा को रोक पाने व शांति बहाल कर पाने में नाकाम रही है। इससे मैतेई व कुकी दोनों ही मुंदायों में भाजपा सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ काफी गुस्सा है। ऐसे में आदिवासी संगठन ने सरकार को चुनौती देते हुए अब अपनी स्वघोषित सरकार बना ली है। हालांकि, इस खबर के आने के बाद हिंसा के मामले में सुस्त पड़ी मणिपुर की सरकार एकदम से जाग पड़ी है और उसने आदिवासी नेताओं के खिलाफ देशद्रोही मामले दर्ज किए हैं।

आदिवासी संगठन ने मणिपुर के कुछ जिलों में ‘स्वशासन’ की घोषणा की है। यह एक तरह से केंद्र की मोदी सरकार को मुंह चिढ़ाने जैसा है। मणिपुर में कुकी-जो लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने तेंगनौपाल, कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में ‘स्व-शासन’ की घोषणा की है। आईटीएलएफ के एक नेता ने कहा कि हमें ‘मैतेई मणिपुर सरकार’ से कोई उम्मीद नहीं है और अगर केंद्र हमें मान्यता नहीं देता है तो हमें कोई परवाह नहीं है।
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आईटीएलएफ के एक नेता ने कहा कि आदिवासी समुदाय का एक अलग मुख्यमंत्री होगा और समुदाय के उन सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जिन्हें ३ मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद राज्य की राजधानी इंफाल से बाहर कर दिया गया था। आईटीएलएफ के महासचिव मुआन टॉम्बिंग ने बताया कि केंद्र सरकार के ‘चयनात्मक न्याय’ के मद्देनजर उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘अगर केंद्र हमें मान्यता नहीं देता है तो हमें कोई परवाह नहीं है। इस योजना पर पिछले एक महीने से चर्चा चल रही है। तेंगनौपाल, कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में कुकी-जो लोगों का स्वशासन होगा। हमें ‘मैतेई मणिपुर सरकार’ से कोई उम्मीद नहीं है।’ इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। टॉम्बिंग ने कहा कि अगस्त में संसद में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कुकी-जो लोगों को ‘बाहरी’ कहा गया था। इसलिए उन्होंने भविष्य में शाह से मिलने से इनकार कर दिया। आईटीएलएफ ने बीते ३ मई से गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की है। पिछले हफ्ते इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों की एक टीम और गृह मंत्रालय के सलाहकार (पूर्वोत्तर) एके मिश्रा ने चुराचांदपुर में आईटीएलएफ नेताओं से मुलाकात की थी। टॉम्बिंग ने कहा कि छात्र जातीय हिंसा के कारण पीड़ित हैं और केंद्र जान-बूझकर उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘८०० से अधिक छात्र हैं, जिनका भविष्य खतरे में है। लगभग १२० मेडिकल छात्र और ६०० से अधिक नर्सिंग छात्र पिछले कई महीनों से अपनी शिक्षा जारी रखने में असमर्थ हैं, क्योंकि उन्हें घाटी स्थित कॉलेजों से बाहर निकाल दिया गया है।’ इससे पहले भारतीय जनता पार्टी सहित १० कुकी-जो विधायकों ने अलग प्रशासन की मांग की थी। मालूम हो कि बीते ३ मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से १८० से अधिक लोगों की जान चली गई है। यह हिंसा तब भड़की थी, जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया था। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग ५३ प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नगा और कुकी समुदाय शामिल हैं, ४० प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं। आईटीएलएफ ने बुधवार को चुराचांदपुर में विरोध मार्च निकाला था।

आदिवासी समुदाय का एक अलग मुख्यमंत्री होगा और समुदाय के उन सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जिन्हें ३ मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद राज्य की राजधानी इंफाल से बाहर कर दिया गया था।’

 

 

अन्य समाचार