शिव जी पर दोहे

शिव की करके वन्दना,
नित करती मैं ध्यान।
मेरी श्रृद्धा का प्रभु,
रखना हरदम मान।।
करते हैं जिस पर कृपा,
मेरे भोले नाथ।
कष्टों में रहते सदा,
शिव जी उसके साथ।।
जल पीकर शिव भक्ति का
आज मिटी है प्यास।
मन को करने भक्ति मय,
आया श्रावण मास।।
शिव करुणा के सार हैं,
शिव सबके आधार।
शिव भक्तों की भक्ति हैं,
शिव जग पालनहार।।
जपते ही शिव नाम को,
मिटते सब संताप।
मुक्ति द्वार खुलते सदा,
हरते सारे पाप।।

रीता अमर कुशवाहा

अन्य समाचार