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टाइफून में ड्रैगन खेलेगा तूफानी खेल! चीन की मंशा से ताइवान, अमेरिका पर खतरा, जापान और फिलीपींस में भी घबराहट

एजेंसी / बीजिंग
खुराफातों के लिए कुख्यात चीन अपने लाभ के लिए कुछ भी कर सकता है। चीन के लैब से निकली वैश्विक महामारी कोरोना के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई, लेकिन उन विषम परिस्थितियों का चीन ने भरपूर लाभ उठाया। अब ड्रैगन यानी चीन एक बार फिर खुराफात पर उतारू है। ताइवान को लेकर अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच ड्रैगन तूफान से खेलने की तैयारी कर रहा है। इस साल के सबसे ताकतवर टाइफून (तूफान) हिनानोर के दौरान युद्धाभ्यास का एलान करके चीन ने तमाम विरोधियों को सकते में डाल दिया है। इससे ताइवान, अमेरिका, जापान और फिलीपींस सहित उसके तमाम दुश्मन देश खौफजदा हैं।
बता दें कि हेनामोर नमक कैटेगरी ५ का सुपर ट्रॉपिकल साइक्लोन दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्टेट के बीच में से गुजर रहा है। इसके खासकर जापान के दक्षिणी द्वीपों के लिए खतरा बनने की आशंका जताई जा रही है, तो चीन के पूर्वी तट पर भी बेकाबू हवाओं के जोखिम को बढ़ने का अनुमान है। फिलहाल २५७ प्रति किलोमीटर की रफ्तार से आगे बढ़ रहे तूफान को गंभीरता से लेते हुए ताइवान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम ने अपनी कोस्ट गार्ड के साथ नौसेना के जंगी जहाजों को बंदरगाह में रहने के निर्देश दिए हैं। लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस खराब मौसम का फायदा उठाने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं। तभी चीन ने तूफान के दौरान दक्षिण चीन सागर में अपनी नौसेना का युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है। इस दौरान तमाम विरोधी देशों की नौसेना और कोस्ट गार्ड के जहाज तट रेखा और एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन की रक्षा करने के लिए आसपास मौजूद नहीं होने का फायदा चीन की नौसेना उठा सकती है। ऐसी आशंका जताई जा रही है। खासकर स्पार्टली आईलैंड पर, जिसे लेकर चीन पहले ही इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में केस हार चुका है, लेकिन चीन कहता है कि २००० साल पहले इन द्वीप समूह की खोज चीन के निवासियों ने की थी, लिहाजा इस पर उसका कब्जा होना चाहिए, जिसे अधिकांश देश नहीं मानते हैं। इससे एक और संकेत देने की कोशिश कर रहा है लाल ड्रैगन कि, अगर ताइवान पर युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपींस वियतनाम, अमेरिका समेत कोई भी देश उसकी रक्षा के लिए आया तो चीन की सेना पूर्वी और दक्षिणी दोनों सागरों में युद्ध के लिए तैयार है। वहीं दक्षिणी चीन सागर से ताइवान के साथ-साथ फिलीपींस के लिए भी खतरा है। इसमें अमेरिका की साख दांव पर लगी हुई है ,क्योंकि अमेरिका का सातवां प्रशांत बेड़ा इसी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात है।

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