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एलएसी पर ड्रैगन की नजर, सूचनाएं जुटाने के लिए जिनपिंग ने बिछाया नया जाल, नेपाली-तिब्बती लोगों की कर रहा है पीएलए में भर्ती

एजेंसी / बीजिंग
विस्तारवादी चीन से उसके सभी पड़ोसी देश परेशान हैं। खासकर हिंदुस्थान के प्रति चीन की मंशा हमेशा से बुरी ही रही है। इसलिए चीन एक तरफ पाकिस्तान को उकसा कर और शस्त्र-आर्थिक मदद देकर हिंदुस्थान के खिलाफ साजिशें रचता रहता है तो वहीं दूसरी तरह एलएसी पर खुद खुराफात करता रहता है। हिंदुस्थान की आर्थिक व सामरिक ताकत का मुकाबला करने के लिए चीन एक तरफ व्यापार और बातचीत की कूटनीति पर काम करता है तो वहीं दूसरी तरफ एलएसी पर अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने की कोशिशों में जुटा है। इन्हीं प्रयासों के तहत चीन इन दिनों नेपाली एवं तिब्बती नागरिकों को अपनी सेना में भर्ती कर रहा है। एलएसी पर नजर रखने और तिब्बती व नेपाली नागरिकों की मदद से हिंदुस्थान की सामरिक तैयारियों पर नजर रखने के लिए चीन ऐसा कर रहा है, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।

बता दें कि लद्दाख में जारी सीमा विवाद के बीच हिंदुस्थान पर नजर रखने के लिए ड्रैगन यानी चीन तमाम तरह के पैंतरे आजमा रहा है। नई नीतियों के तहत चीन अपनी सेना में तिब्बत और नेपाल से हिंदी भाषा जानने वालों की भर्ती कर रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) तिब्बत और नेपाल से खुफिया जानकारी हासिल करने में सक्षम लोगों को सेना में जगह दे रही है। एक लेटेस्ट इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर चल रही खबरों से पता चला है कि चीन के इस भर्ती अभियान को आगे बढ़ाने के लिए तिब्बत सैन्य जिले के अधिकारी हिंदी ग्रेजुएट्स लोगों की तलाश में यूनिवर्सिटी का दौरा कर रहे हैं। गौरतलब है कि तिब्बत सैन्य जिला पीएलए के पश्चिमी थिएटर कमांड के कंट्रोल में है। जो कि एलएसी के निचले हिस्से की देख-रेख करता है।

इस क्षेत्र में हिंदुस्थान के अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम शामिल हैं। रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा है कि अपने नापाक इरादों के चलते चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ज्यादा से ज्यादा तिब्बतियों को रिक्रूट करने पर फोकस करती आई है, जबकि नियमित मिलिशिया यूनिट की भर्ती करने पर उसका फोकस कम हुआ है। कई खुफिया जानकारियों से पता चला है कि पिछले साल चीन की सेना ने तिब्बतियों को अधिक संख्या में भर्ती करने का अभियान चलाया था। एक अन्य इंटेलिजेंस इनपुट के मुताबिक, मौजूद समय में चीन की सेना में करीब ७ हजार सक्रिय तिब्बती रक्षा बल हैं। इनमें से एक हजार तिब्बतियों में १०० महिलाएं भी शामिल हैं। खास बात यह कि जून २०२० में गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुए संघर्ष के बाद चीन ने हिंदी भाषा जाननेवालों को लेकर भर्ती अभियान चलाया है।

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